कानपुर। जेल में बंद वाहन चोरी के आरोपी की इलाज के दौरान मौत के मामले में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बंदी का पोस्टमार्टम 23 अक्टूबर को पैनल और वीडियोग्राफी की निगरानी में कराया गया था, जबकि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की ड्यूटी रोस्टर के मुताबिक 25 अक्टूबर को थी। ऐसे में तय तारीख से दो दिन पहले पोस्टमार्टम कराए जाने का मामला सामने आया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सेप्टिसीमिया का जिक्र
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बंदी की मौत की वजह सेप्टिसीमिया बताई गई है। वहीं, बंदी के परिजनों ने आरोप लगाया था कि जेल की रसोई में आटा गूंथने से मना करने पर कर्मचारियों ने उसकी पिटाई की थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताई गई मौत की वजह और परिजनों के आरोप अलग-अलग पहलू हैं, जिनकी जांच जरूरी है।
जेल के डॉक्टर को पैनल में शामिल करने पर सवाल
बंदी की तबीयत बिगड़ने पर जेल के डॉक्टर ने उसे उर्सला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी थी। बाद में पोस्टमार्टम के लिए पहले से तय डॉक्टरों में बदलाव किया गया। एक डॉक्टर की ड्यूटी बिल्हौर कैंप में लगा दी गई और उनकी जगह जेल के डॉक्टर को पोस्टमार्टम पैनल में शामिल किया गया।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चर्चा में
पोस्टमार्टम पैनल में जेल के डॉक्टर को शामिल किए जाने और तय रोस्टर से पहले पोस्टमार्टम कराए जाने को लेकर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में पोस्टमार्टम की तारीख, डॉक्टरों की ड्यूटी में बदलाव और बंदी की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण है।









