
- हर रोज हो रहे सड़क हादसे, 2024 में एक्सीडेंट और मौतों का आंकड़ा फिर बढ़ा; प्रशासनिक दावे ज़मीन पर फेल
- लखनऊ में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार ऊपर, सुधार कार्य अब भी अधर में
- 62 ब्लैक स्पॉट चिन्हित, लेकिन आधे से ज़्यादा पर नहीं हुआ कोई सुधार
लखनऊ। लखनऊ की सड़कें इन दिनों हादसों का दूसरा नाम बन चुकी हैं। शहर और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर अब तक 62 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जा चुके हैं, जिनमें से 13 यलो ज़ोन और 4 रेड ज़ोन के रूप में दर्ज हैं। इन स्थानों पर एक्सीडेंट होना अब आम बात हो गई है, लेकिन सुरक्षा उपायों और सुधार कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी है।
2023 के मुकाबले 2024 में बढ़े हादसे
परिवहन विभाग के अनुसार, 2023 में प्रदेश भर में 44,534 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2024 में बढ़कर 46,052 हो गईं — यानी 3.4% की बढ़ोतरी। वहीं, सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या भी बढ़कर 24,118 पहुंच गई, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 23,652 था। घायलों की संख्या में भी 11.5% की बढ़त दर्ज की गई है।
एंट्री पॉइंट्स पर सुरक्षा व्यवस्था लचर
शहर के मुख्य 9 प्रवेश मार्गों जैसे सीतापुर रोड, हरदोई रोड, कानपुर रोड, रायबरेली रोड, सुल्तानपुर रोड आदि पर ट्रैफिक का भारी दबाव है। इन क्षेत्रों में रात के समय स्ट्रीट लाइट न होना, अनियंत्रित स्पीड और खतरनाक कट्स, हादसों को न्यौता देते हैं।
प्रशासन के वादे अधूरे
ब्लैक स्पॉट्स के सुधार के लिए कई योजनाएं बनाई गईं थीं, लेकिन 50% से अधिक स्थानों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कुछ जगहों पर केवल स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जबकि जरूरी साइनेज, लाइटिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट आज भी नहीं हैं।
साल भर पहले बनी थी योजना, प्रगति नहीं के बराबर
साल 2023 में 55 ब्लैक स्पॉट्स पर काम शुरू करने की योजना बनाई गई थी, जिसमें 28 करोड़ रुपये की लागत तय की गई थी। पीडब्ल्यूडी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन आज तक इन कार्यों की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। कई स्थानों पर या तो काम शुरू ही नहीं हुआ, या बहुत धीमी गति से चल रहा है।
डीएम ने जताई चिंता, पर टाइमलाइन नहीं
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक्सीडेंट जोन पर सुधार कार्यों में तेजी लाई जाए और ट्रैफिक पुलिस, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और परिवहन विभाग के बीच समन्वय से ठोस एक्शन प्लान बने। हालांकि, यह कार्य कब तक पूरा होगा, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।








