
- मृत समझी गई महिला 4 साल बाद जिंदा मिली – पुलिस जांच पर सवाल
- झूठे केस में 2 साल जेल काटा, अब न्याय की उम्मीद
- DNA रिपोर्ट नहीं आने दी, फिर भी पति को बनाया आरोपी
बेंगलुरु ।कर्नाटक के कोडागु जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 2020 में एक महिला को मृत मान लिया गया था और उसके पति को उसकी हत्या के आरोप में जेल भेज दिया गया था। लेकिन अब वही महिला जिंदा मिली है, जिसने पुलिस जांच की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
क्या हुआ था?
- सुरेश और मल्लीगे की 18 साल पहले शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं।
- नवंबर 2020 में मल्लीगे लापता हो गईं और सुरेश ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
- कुछ समय बाद पेरियापट्टना तालुक में एक महिला का कंकाल मिला, जिसे पुलिस ने मल्लीगे का बताया।
- बिना DNA टेस्ट के ही पुलिस ने सुरेश पर हत्या का आरोप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी।
- सुरेश को 2 साल जेल में बिताने पड़े, जबकि बाद में DNA रिपोर्ट में पता चला कि कंकाल मल्लीगे का नहीं था।
महिला जिंदा मिली, नई शादी कर चुकी थी
1 अप्रैल 2025 को सुरेश के एक दोस्त ने मल्लीगे को मदिकेरी के एक होटल में अपने बॉयफ्रेंड गणेश के साथ देखा। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया, जहां उसने स्वीकार किया कि वह अपने प्रेमी के साथ भाग गई थी और उससे शादी कर ली थी। हैरानी की बात यह है कि वह पिछले 4 साल से शेट्टीहल्ली गांव में रह रही थी, जो मदिकेरी से महज 30 किमी दूर है, लेकिन पुलिस ने उसे खोजने की कोशिश तक नहीं की।
कोर्ट ने पुलिस की जांच पर उठाए सवाल
सेशंस कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की जांच पर सख्त सवाल उठाए:
- क्यों DNA रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चार्जशीट दाखिल की गई?
- क्यों पुलिस ने महिला की तलाश नहीं की, जबकि वह पास के गांव में मौजूद थी?
- जिस कंकाल को मल्लीगे का बताया गया, वह असल में किसका था?
कोर्ट ने जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को 17 अप्रैल तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
पीड़ित पति को मिलेगा मुआवजा?
सुरेश के वकील ने बताया कि वे अदालत के आदेश के बाद हाईकोर्ट में मुआवजे की मांग करेंगे। साथ ही, मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग (सुरेश ST समुदाय से हैं) में भी शिकायत की जाएगी।








