
- गलत खाता नंबर और अधूरी जानकारी बनी छात्रवृत्ति में बाधा, मासूम छात्र अब भी कर रहे इंतज़ार
- त्योहारों पर किताबों और बैग की उम्मीदें अधूरी, 1227 बच्चों को नहीं मिल पाई छात्रवृत्ति
- बैंकिंग त्रुटियों ने तोड़ी गरीब छात्रों की उम्मीदें, शासन से मिली राशि अभी अधूरी वितरण मे
अम्बेडकरनगर। ज़िले के संस्कृत विद्यालयों में पढ़ रहे सैकड़ों छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति की राह ताक रहे हैं। शासन द्वारा स्वीकृत राशि के बावजूद 1227 छात्र अब तक अपने हिस्से की छात्रवृत्ति से वंचित हैं।
शासन ने जिले के 34 संस्कृत विद्यालयों में पढ़ने वाले 3901 छात्रों के लिए कुल ₹39.65 लाख की छात्रवृत्ति राशि जारी की थी। परंतु तकनीकी कारणों—जैसे कि गलत बैंक खाता संख्या, अधूरा आईएफएससी कोड, आधार लिंकिंग की समस्या या नाम में त्रुटि—के कारण यह राशि केवल 2674 छात्रों को ही मिल सकी।
छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 6-7 को ₹50, कक्षा 8 को ₹75, कक्षा 9-10 को ₹100 और कक्षा 11-12 के छात्रों को ₹150 प्रतिमाह देने का प्रावधान है। दशहरा और दीपावली के पहले दो किस्तों के वितरण की योजना थी, लेकिन कई छात्रों को आज तक एक भी राशि नहीं मिली।
विद्यालय प्रशासन द्वारा ऑफलाइन फॉर्म भरवाकर खाते खुलवाने की प्रक्रिया चलाई गई है, लेकिन बैंकिंग की जानकारी के अभाव में कई अभिभावकों द्वारा गलत विवरण भर दिए गए। यही कारण है कि तमाम छात्रों को सहायता नहीं मिल सकी।
संस्कृत पटल सहायक शशिकांत वर्मा ने बताया कि “जिन छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली है, उनके दस्तावेजों का संशोधन किया जा रहा है और जल्द ही उनकी राशि भी भेज दी जाएगी।”
इस देरी ने बच्चों और उनके अभिभावकों को निराश किया है। रिक्शा चालक रामप्रसाद वर्मा ने कहा, “छात्रवृत्ति आएगी, तो बेटी के लिए जूते और स्कूल बैग लेंगे।” परंतु यह इंतज़ार अभी भी जारी है।








