
- अम्बेडकरनगर में समाधान दिवस पर 308 शिकायतें आईं, केवल 34 का निस्तारण हुआ
- समाधान दिवस का असर: 89 प्रतिशत शिकायतें फिर से लटकीं, प्रशासन पर उठे सवाल
- जिलाधिकारी की चेतावनी: “समाधान के बजाय सिर्फ़ आश्वासन नहीं चलेगा”
अम्बेडकरनगर। अम्बेडकरनगर के पाँच तहसीलों में आयोजित “संपूर्ण समाधान दिवस” ने सैकड़ों फरियादियों को प्रशासन से उम्मीदें और समाधान की आशा दी, लेकिन दिन के अंत तक केवल 34 शिकायतों का निस्तारण हो सका, जबकि 308 शिकायतें दर्ज हुईं। इस आयोजन के दौरान ज़िले की विभिन्न तहसीलों में हजारों की संख्या में लोग समस्याओं के समाधान के लिए उपस्थित हुए, लेकिन अधिकांश को आश्वासन और “जल्द कार्रवाई” की उम्मीदों के साथ लौटना पड़ा।
मुख्य बिंदु:
जिलाधिकारी अविनाश सिंह की अध्यक्षता में समाधान दिवस की शुरुआत हुई, जिसमें पुलिस अधीक्षक केशव कुमार, मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला, और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। फरियादी अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आए थे, जिनमें जमीन विवाद, पेंशन की लंबी प्रक्रिया, और विवाह अनुदान जैसी शिकायतें शामिल थीं।
लेकिन जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि, “यह समाधान दिवस कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास का पुल है। यदि फरियादी सिर्फ़ आश्वासन लेकर लौटते हैं तो यह प्रशासन की विफलता होगी।”
आंकड़ों ने यह साफ कर दिया कि प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं थे। 308 शिकायतों में से केवल 34 का ही निस्तारण हुआ, जबकि 89 प्रतिशत शिकायतें फिर से इंतजार की सूची में डाल दी गईं।
तहसीलवार आंकड़े:
अकबरपुर में 89 शिकायतें,
आलापुर में 67 शिकायतें,
टांडा में 19 शिकायतें,
भीटी में 52 शिकायतें,
जलालपुर में 81 शिकायतें आईं, लेकिन अधिकांश समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
यह स्थिति प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है और यह सवाल खड़ा करती है कि क्या “समाधान दिवस” केवल एक सरकारी उत्सव बनकर रह गया है, जहाँ अधिकारियों की बैठक तो होती है, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकलता।








