
- दो वर्षों से क्षतिग्रस्त विद्युत पोल, बांस-बल्ली के सहारे ग्रामीण कर रहे बिजली का उपयोग
- खुले तारों से स्कूली बच्चों और फसलों को जानलेवा खतरा, विभाग मांग रहा 20 हजार रुपये
- स्थानीय विधायक और बिजली विभाग की चुप्पी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
अम्बेडकरनगर | कटेहरी विधानसभा क्षेत्र – मीरपुर गांव में बिजली अब विकास का साधन नहीं, बल्कि एक खतरनाक जोखिम बन गई है। गांव की बिजली आपूर्ति पिछले दो वर्षों से बांस-बल्ली के सहारे की जा रही है। जर्जर व्यवस्था ने न केवल ग्रामीणों की दिनचर्या को खतरे में डाल दिया है, बल्कि संभावित हादसों का बड़ा कारण भी बन रही है।
12 विद्युत पोल दो साल से क्षतिग्रस्त, समाधान की जगह मिल रहा ‘एस्टीमेट’
ग्रामीणों के अनुसार, रामलाल की चाय की दुकान से गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर करीब दो साल पहले 12 विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हो गए थे। तब से अब तक विभागीय स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्थानीय पावर हाउस महरुआ और जेई अनिल कुमार से कई बार शिकायत की गई, लेकिन जवाब में सिर्फ फाइलों का ‘एस्टीमेट’ थमाया गया और 15 से 20 हजार रुपये की मांग की गई।
ग्रामीणों का सवाल है– “क्या हमें अपनी जान की कीमत चुकानी होगी बिजली पाने के लिए?”
खुले तारों से बच्चों और फसलों को खतरा
गांव की गलियों, खेतों और रास्तों से गुजरते खुले तारों ने खतरे की नई इबारत लिख दी है। ग्रामीण बताते हैं कि रोज़ाना सैकड़ों स्कूली बच्चे इन्हीं खतरनाक तारों के नीचे से गुज़रते हैं। वहीं खेतों में खड़ी गेहूं की फसलें भी इन तारों की चपेट में हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़ा अग्निकांड हो सकता है।
जनप्रतिनिधि भी नाकाम, अब आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने स्थानीय विधायक धर्मराज निषाद से भी इस मुद्दे पर गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से भी केवल आश्वासन मिला—कार्रवाई नहीं। बाबूलाल, अनिल सिंह, शत्रुघ्न सिंह, अनिल वर्मा, सुनील वर्मा, सोनू सिंह और दीपू वर्मा समेत दर्जनों ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी विद्युत पोल नहीं लगाए गए, तो वे कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।








