
- सदियों पुरानी प्रतिमा के दर्शनों को उमड़े श्रद्धालु
शोभायात्रा में गूंजे जयकारे, भक्तों ने किए ध्वज अर्पण
त्रेतायुग से जुड़ी मान्यताओं ने बढ़ाई श्रद्धा
गाजीपुर | चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर शनिवार को जिलेभर में हनुमान जयंती की धूम देखी गई। कोट किला कोहना स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने दर्शन-पूजन के साथ संकटमोचन हनुमान की आराधना की और मंदिर में ध्वज अर्पित किए।
त्रेतायुगीन मंदिर में विराजमान हैं संकटमोचन
स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह मंदिर त्रेता युग में महर्षि विश्वामित्र के पिता राजा गांधि द्वारा स्थापित किया गया था। मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा की विशेषता है कि उनका एक पैर धरती के अंदर और दूसरा घुटनों के पास से मुड़ा हुआ है। जानकारों का मानना है कि यह मूर्ति पहले ज़मीन के काफी नीचे थी, जो अब धीरे-धीरे ऊपर आ रही है, जिससे भक्तों को सहजता से दर्शन हो रहे हैं।
मारवाड़ी समाज ने निकाली भव्य शोभायात्रा
हनुमान जयंती के अवसर पर शहर के मारवाड़ी समाज द्वारा एक विशेष शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा रानी सती मंदिर से आरंभ होकर हनुमान मंदिर तक पहुंची। यात्रा में सैकड़ों महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और अपने घरों को लौटे।
चैत्र पूर्णिमा को ही हुआ था हनुमान जी का जन्म
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा के दिन हुआ था। बाल्यकाल में उन्होंने सूर्य को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया था, जिस पर इंद्र ने वज्र से प्रहार कर दिया था। इससे वे मूर्छित हो गए थे और पवन देव के रुष्ट हो जाने से सृष्टि में वायु प्रवाह रुक गया था। देवताओं ने एकत्र होकर हनुमान जी को पुनर्जीवित किया। इस घटना को ही विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।








