- अम्बेडकरनगर रोडवेज में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों पर कड़ी नजर
- फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष जांच टीम का गठन
- निशुल्क बस सेवा का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
अम्बेडकरनगर। प्रदेश सरकार की दिव्यांगजन हितैषी योजनाओं को बदनाम करने वाले उन लोगों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं जो फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिखाकर रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा कर रहे थे। इन तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
जांच टीम का गठन, प्रमाणपत्रों की जांच होगी सख्ती से
अकबरपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक कुंवर हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि कई बार शिकायतें आईं थीं कि कुछ लोग फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा कर रहे हैं, जिससे वास्तविक लाभार्थियों के अधिकारों का हनन हो रहा है और परिवहन निगम को राजस्व की हानि हो रही है। इसे रोकने के लिए परिवहन निगम द्वारा एक विशेष दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है, जो प्रतिदिन विभिन्न रूटों पर चलने वाली बसों में दिव्यांग यात्रियों के प्रमाणपत्रों की जांच करेगी। यदि प्रमाणपत्र में दिए गए विवरण सूची से मेल नहीं खाते तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
सफल अभियान के बाद अन्य जिलों में लागू करने की योजना
अकबरपुर डिपो के प्रशासन ने पड़ोसी जिलों जैसे आजमगढ़ और सुलतानपुर के दिव्यांगजन विभाग को अधिकृत प्रमाणपत्र धारकों की सूची भेजने का अनुरोध किया है, ताकि इन जिलों से आने वाली बसों में यात्रा करने वाले दिव्यांग यात्रियों की जांच की जा सके। सफल अभियान के बाद इसे अयोध्या मंडल के अन्य जिलों जैसे गोंडा, बस्ती, बलरामपुर और अयोध्या में भी लागू करने की योजना है।
निशुल्क यात्रा का अनुचित लाभ उठाने वालों पर कड़ी निगरानी
अकबरपुर डिपो से दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, आजमगढ़ जैसे महत्वपूर्ण शहरों के लिए 88 बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें सैकड़ों दिव्यांग यात्री यात्रा करते हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार दिव्यांगजन के लिए निशुल्क बस सेवा जैसे योजनाएं उनके सशक्तिकरण के लिए चला रही हैं, लेकिन कुछ लोग इन योजनाओं का अनुचित लाभ उठाकर व्यवस्था को बदनाम कर रहे हैं। अब ऐसे लोगों पर निगरानी रखी जाएगी और प्रमाणपत्र की वैधता की जांच की जाएगी।








