
- KIIT में नेपाली छात्रा प्रसा साहा की संदिग्ध आत्महत्या
- पुलिस ने शव मिलने के बाद जांच शुरू की, आत्महत्या का संदेह
- फरवरी में भी KIIT में एक नेपाली छात्रा की आत्महत्या हुई थी
भुवनेश्वर। कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) में एक नेपाली छात्रा, प्रसा साहा (18 साल), हॉस्टल कमरे में पंखे से लटकी हुई पाई गई। शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस इस पर अभी और जानकारी एकत्रित कर रही है। प्रसा बीटेक साइंस की छात्रा थी और पुलिस ने इस घटना की सूचना नेपाली दूतावास को दे दी है।
पुलिस की शुरुआती जांच: आत्महत्या का संदेह
पुलिस कमिश्नर एस देव दत्ता सिंह ने बताया कि घटना के बाद प्रसा के माता-पिता को सूचित कर दिया गया है, और वे शुक्रवार को भुवनेश्वर पहुंचेंगे। इसके बाद ही पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस ने यह भी बताया कि हॉस्टल के अधिकारी शाम के समय अटेंडेंस लेते समय प्रसा के कमरे से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर शंका जताई, जिसके बाद पुलिस को सूचित किया गया और दरवाजा खोलते ही प्रसा का शव पंखे से लटका हुआ मिला।
पहले भी KIIT में आत्महत्या का मामला
यह पहली बार नहीं है जब KIIT में आत्महत्या का मामला सामने आया हो। फरवरी में भी, बीटेक थर्ड ईयर की छात्रा प्रकृति लामसाल ने अपनी जान ले ली थी। इस मामले में छात्रों ने आरोप लगाया था कि छात्रा को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था, और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई में ढिलाई दिखाई थी। छात्रों का कहना था कि आरोपी भारतीय छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी, जिससे मामला और बिगड़ गया।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाए
प्रकृति लामसाल की आत्महत्या के बाद, KIIT में पढ़ाई कर रहे नेपाली छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मामले को दबाने और सख्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। छात्रों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया, तो उन्हें हॉस्टल से बाहर निकाल दिया गया और कुछ छात्रों को जबरन कटक रेलवे स्टेशन भेजा गया। इस घटना के बाद छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज किया था।
ओडिशा सरकार ने गठित की उच्च स्तरीय जांच समिति
ओडिशा सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, और उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त-सह-सचिव शामिल हैं। यह समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।







