- पाकिस्तान में 3 करोड़ लोगों पर जल संकट का खतरा
- चार दिन में खत्म हो सकता है पेयजल का भंडार
- चिनाब नदी का जलस्तर 7 फीट तक घटा
जम्मू-कश्मीर। भारत ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने सियाल और बगलिहार बांधों के गेट बंद कर दिए हैं, जिससे पाकिस्तान जाने वाला पानी रुक गया है। इस कदम के बाद पाकिस्तान में चिनाब का जल स्तर गिरकर 15 फीट रह गया है, जबकि पहले यह 22 फीट था। मात्र 24 घंटे में जल स्तर 7 फीट कम हो गया है।
पाकिस्तान पर संकट, 3 करोड़ लोग प्रभावित हो सकते हैं
पाकिस्तान के लिए चिनाब नदी का सूखना गंभीर संकट लेकर आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले 4 दिनों में पंजाब प्रांत के 24 प्रमुख शहरों में 3 करोड़ से अधिक लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। फैसलाबाद और हाफिजाबाद जैसे घनी आबादी वाले शहरों की 80% आबादी चिनाब के पानी पर निर्भर है।
सिंधु जल प्राधिकरण (IWPA) ने चेतावनी दी है कि भारत के इस कदम से पाकिस्तान में खरीफ की फसलों के लिए पानी की आपूर्ति 21% तक कम हो सकती है। इससे कृषि और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: “युद्ध जैसी कार्रवाई”
पाकिस्तानी सरकार और राजनेताओं ने भारत के इस कदम को “युद्ध छेड़ने वाली कार्रवाई” बताया है।
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बिलावल भुट्टो (पूर्व विदेश मंत्री, पीपीपी) ने 25 अप्रैल को एक रैली में कहा – “सिंधु नदी में या तो हमारा पानी बहेगा, या फिर उनका (भारत का) खून बहेगा। यह नदी हमारी है और हमारी ही रहेगी।”
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ख्वाजा आसिफ (विदेश मंत्री) ने 4 मई को धमकी दी – “अगर भारत ने सिंधु नदी पर डैम बनाया, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई करेगा।”
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शहबाज शरीफ (पूर्व पीएम) ने 1 मई को आरोप लगाया – “भारत ने युद्ध भड़काने वाले फैसले किए हैं और पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है।”
क्या है सिंधु जल समझौता?
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुए सिंधु जल समझौते के तहत छह नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) का पानी बांटा गया था। इसके अनुसार:
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भारत को रावी, ब्यास और सतलुज (पूर्वी नदियाँ) का पूर्ण अधिकार मिला।
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पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब (पश्चिमी नदियाँ) का अधिकार दिया गया, लेकिन भारत सीमित उपयोग कर सकता है।
हालांकि, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को रोक दिया है।
पाकिस्तान पर क्या होगा असर?
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कृषि संकट: पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु, झेलम और चिनाब पर निर्भर है। पानी की कमी से फसलें बर्बाद हो सकती हैं।
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बिजली उत्पादन घटेगा: पाकिस्तान कई हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स से बिजली बनाता है। पानी कम होने से बिजली संकट गहराएगा।
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आर्थिक मंदी: कृषि और उद्योग प्रभावित होंगे, जिससे पहले से डूबी अर्थव्यवस्था को और झटका लगेगा।
निष्कर्ष
भारत का यह कदम पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अगर पानी की आपूर्ति लंबे समय तक रुकी रही, तो पाकिस्तान में गंभीर जल, खाद्य और ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। वहीं, पाकिस्तानी नेताओं की धमकी भरे बयानों से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।








