कानपुर में भाजपा नेता रवि सतीजा से 50 लाख की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। न्यायमूर्ति संतोष राय की खंडपीठ ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की कि “बेकसूर लोगों को फर्जी केस में फंसाकर वसूली करने का केंद्र बिंदु अखिलेश दुबे ही है।”
गौरतलब है कि SIT ने 6 अगस्त को अखिलेश दुबे को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जांच के दौरान उसके गिरोह से जुड़े कई राज खुलते गए और अब तक 6 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। SIT ने बताया कि अब तक 50 से अधिक लोग जमीन कब्जे, वसूली और फर्जी रेप केस में फंसाकर रंगदारी मांगने की शिकायतें कर चुके हैं। सभी मामलों की जांच फिलहाल जारी है।
गवाही में हुआ खुलासा:
भाजपा नेता रवि सतीजा के खिलाफ दर्ज मुकदमे में बयान देने वाली बहनों ने अदालत में स्वीकार किया कि यह शिकायतें अखिलेश दुबे के दबाव में दर्ज कराई गई थीं। वहीं, रंगदारी केस में सुशील त्रिवेदी की गवाही और पेश की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग ने दुबे की भूमिका को और पुख्ता किया।
कोर्ट का कड़ा रुख:
अदालत ने यह भी माना कि अगर आरोपी को बेल दी गई तो वह अपने वकील पेशे का दुरुपयोग करते हुए गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर सकता है। इसलिए जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया।








