20 साल बाद आलापुर सीट के आरक्षण को चुनौती, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

परिसीमन आदेश में हस्तक्षेप से इनकार, अदालत ने कहा- इतने लंबे समय बाद चुनौती देने का औचित्य नहीं

अंबेडकरनगर। आलापुर विधानसभा सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने खारिज कर दी है। करीब दो दशक बाद दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि वर्ष 2006 के परिसीमन आदेश को इतने लंबे अंतराल के बाद चुनौती देने का औचित्य नहीं है। याची संवैधानिक उल्लंघन भी साबित नहीं कर सका।

यह फैसला न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अंबेडकरनगर निवासी दिलीप कुमार की याचिका पर सुनाया। याचिका में जिले की विधानसभा सीटों के परिसीमन और आलापुर सीट के आरक्षण को चुनौती दी गई थी।

पांच सीटों की आबादी में असमानता का दिया तर्क

याची ने कटेहरी, टांडा, आलापुर, जलालपुर और अकबरपुर विधानसभा क्षेत्रों की आबादी में अंतर का हवाला दिया था। उसका तर्क था कि इससे संविधान के अनुच्छेद 170(2) का उल्लंघन होता है। इसी आधार पर परिसीमन और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग की गई थी।

2006 के आदेश को दोबारा खोलने से इनकार

अदालत ने कहा कि पांच दिसंबर 2006 को प्रकाशित परिसीमन आदेश को कानूनी मान्यता प्राप्त है। केवल जनसंख्या और जातिगत आंकड़ों की अलग गणना के आधार पर इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता।

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में जनसंख्या का अनुपात यथासंभव समान रखने का प्रयास होता है। हालांकि, इसमें भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक सीमाओं और अन्य प्रासंगिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा सकता है। औसत जनसंख्या से 10 प्रतिशत तक अंतर की अनुमति संबंधी आंतरिक दिशा-निर्देश को अदालत ने अनिवार्य वैधानिक प्रावधान नहीं माना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button