अम्बेडकरनगर। अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध मादक पदार्थ तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जन शिक्षण केंद्र, कुटियवा-बेवाना और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के संयुक्त तत्वावधान में विकासखंड जलालपुर के कर्मिसिरपुर स्थित मुसहर बस्ती में संचालित प्री-स्कूल सेंटर पर नशा मुक्ति जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में प्री-स्कूल सेंटर के बच्चों, उनकी माताओं और नारी संघ की महिलाओं ने भाग लिया। गोष्ठी में नशे के दुष्प्रभाव, परिवार और समाज पर इसके प्रभाव तथा नशे से दूर रहकर स्वस्थ जीवन अपनाने के महत्व की जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों को बताया गया कि नशे की लत व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल असर डालती है। इसके साथ ही बच्चों और महिलाओं को परिवार में जागरूकता बढ़ाने तथा नशा मुक्त वातावरण बनाने की आवश्यकता पर भी जानकारी दी गई।
जागरूकता को बताया सबसे प्रभावी माध्यम
जन शिक्षण केंद्र की सचिव पुष्पा पाल ने कहा कि नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी लड़ाई जागरूकता के माध्यम से ही लड़ी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार, विशेषकर महिलाएं और बच्चे, नशे के दुष्प्रभाव को समझेंगे तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव होगा। उन्होंने बताया कि जन शिक्षण केंद्र समुदाय के बीच लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित कर रहा है, ताकि नशा मुक्त और सशक्त समाज के निर्माण को बढ़ावा मिल सके।
कानूनी जागरूकता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के भविष्य को प्रभावित करता है। लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के साथ सामाजिक बुराइयों के प्रति भी जागरूक करना प्राधिकरण की प्राथमिकताओं में शामिल है। उपस्थित लोगों से स्वयं नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की गई।









