अंबेडकरनगर। जलालपुर तहसील क्षेत्र के रसूलपुर बाकरगंज गांव में रविवार को मरहूम सैयद हादी हसन और उनकी अहलिया के इसाले सवाब के लिए मजलिस आयोजित की गई। लखनऊ से आए मौलाना सैयद मीसम जैदी ने वालदैन यानी माता-पिता के हुकूक पर रोशनी डालते हुए कहा कि मां-बाप का दर्जा बहुत बुलंद है। उनकी खिदमत करना, उनका एहतराम करना और उनके अधिकारों को पूरा करना हर इंसान की जिम्मेदारी है।
मजलिस की शुरुआत तिलावते कलामे पाक से हुई। इससे पहले मेहंदी जलालपुरी, फसाहत जौनपुरी, जुहैर अकबरपुरी और महमूद जौनपुरी ने पेशख्वानी की। शबीहुल हसन रिजवी ने शोजख्वानी पेश की।
माता-पिता के अधिकारों पर दिया जोर
अपने खिताब में मौलाना मीसम जैदी ने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद और उनकी बेटी जनाबे फातिमा जहरा की अजमत का जिक्र किया। उन्होंने नुजूले आयते ततहीर के बारे में विस्तार से बताया। मौलाना ने कहा कि माता-पिता की इज्जत और सेवा करना नैतिक और धार्मिक दायित्व है। उनके साथ अच्छा व्यवहार करना और उनकी जरूरतों का ख्याल रखना जरूरी है।
बच्चों को बेहतर तालीम दिलाने की अपील
मौलाना ने शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी तालीम दिलाना परिवार की अहम जिम्मेदारी है। शिक्षा से बच्चों का भविष्य बेहतर बनता है और वे जीवन में अपनी जिम्मेदारियां अच्छी तरह निभा पाते हैं। उन्होंने लोगों से बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की।
मजलिस के अंतिम दौर में मौलाना ने कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों का जिक्र किया। इस दौरान माहौल गमगीन हो गया। कार्यक्रम का संचालन मौलाना असगर मेहदी आजमी ने किया।
इस मौके पर सैयद मोहम्मद नासिर, उपनिरीक्षक सैयद मोहम्मद आरिफ, सैयद मोहम्मद ताहिर, अधिवक्ता अब्बास रजा जावेद, मास्टर जीशान हैदर, तनवीर हुसैन, अली जाफर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।









