पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेत दिया है। Bharatiya Janata Party 200 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाते हुए दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ती नजर आ रही है, जबकि All India Trinamool Congress काफी पीछे दिखाई दे रही है।
इन रुझानों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर पिछले दो वर्षों में ऐसा क्या बदला जिससे 15 साल से सत्ता में रही Mamata Banerjee की सरकार कमजोर पड़ गई।
भ्रष्टाचार और विवाद बने मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में सामने आए कथित घोटाले और जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने सरकार की छवि को प्रभावित किया इसके अलावा भर्ती और सार्वजनिक वितरण से जुड़े मुद्दों ने भी जनता के बीच असंतोष बढ़ाया।
छवि और एंटी इनकंबेंसी फैक्टर
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण एंटी इनकंबेंसी फैक्टर भी प्रभावी रहा। ममता बनर्जी की आक्रामक राजनीतिक शैली, जो पहले उनकी ताकत मानी जाती थी, अब कुछ वर्गों में नकारात्मक रूप में देखी गई।
चुनावी रणनीति का असर
भाजपा ने चुनाव में विभिन्न सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिससे उसे व्यापक समर्थन मिलता नजर आया फिलहाल अंतिम नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन रुझान साफ संकेत दे रहे हैं कि बंगाल की राजनीति एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है।









