काशी में 12 नवंबर को भैरव जन्मोत्सव का आयोजन
कालभैरव, लाटभैरव और बटुकभैरव मंदिरों में विशेष पूजा और शृंगार
वाराणसी: मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर 12 नवंबर को काशी में भैरव जन्मोत्सव पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। बाबा कालभैरव, लाटभैरव, बटुकभैरव सहित अन्य प्रमुख भैरव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों की तैयारियां जोरों पर हैं।
कालभैरव मंदिर में विराट आरती और विशाल केक:
- बाबा कालभैरव के विग्रह पर सिंदूर लेपन, रजत मुखौटा और रुद्राक्ष माला धारण कराई जाएगी।
- पूरे मंदिर परिसर को दीपों, पुष्पों और ध्वजों से सजाया जाएगा।
- सायंकाल पांच वैदिक ब्राह्मणों द्वारा वसंत पूजा का आयोजन होगा।
- रात्रि 10 बजे सवा किलो कपूर से विराट आरती संपन्न होगी।
- मंदिर में 151 किलो और चौराहे पर 1100 किलो विशाल फलाहारी केक भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
लाटभैरव और अन्नकूट आयोजन:
- श्रीकपाल भैरव अथवा लाटभैरव प्रबंधक समिति के तहत वैदिक विधान से पूजन और अन्नकूट भोग का आयोजन होगा।
- बालरूप में रजत मुखौटा धारण कराने के बाद बाबा का शृंगार किया जाएगा।
- मंदिर के चबूतरे पर संगीतमय सुंदरकांड पाठ होगा, जिसमें स्थानीय कलाकार और भक्त सहभाग करेंगे।
- रामबाग क्षेत्र में नगर वधुएं पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करेंगी।
भैरव अष्टमी पर शुभ योग:
- इस वर्ष शुक्ल और ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है।
- शुक्ल योग सुबह सूर्योदय से 8:02 बजे तक रहेगा।
- इसके बाद ब्रह्म योग मध्यरात्रि के बाद तक प्रभावी रहेगा।
- मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी तिथि 11 नवंबर रात 11:08 से प्रारंभ होकर 12 नवंबर रात 10:58 तक रहेगी।
भक्तों का मानना है कि इन शुभ योगों में भैरव पूजन करने से भय और विघ्न दूर होते हैं। संपूर्ण काशी नगरी भक्ति और उत्सव के माहौल में गूंज उठेगी, जहां हर गलियारे में “जय कालभैरव” की आवाज़ सुनाई देगी।








