- भाजपा की जमीनी नेता ने प्रशासनिक पक्षपात पर जताया गहरा विरोध
- मालती यादव ने प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए किया आत्मदाह का ऐलान
- विरोधी बिना कागज के भी क्यों बच रहे हैं? भाजपा नेता का सवाल
अम्बेडकरनगर । जहाँ सत्ता, वहाँ न्याय?” यह सवाल अब भाजपा की ही एक जमीनी नेत्री उठा रही हैं। कटेहरी मंडल की भाजपा मंडल मंत्री मालती यादव इन दिनों अपने खेत में खड़ी तीन बीघा गेहूं की फसल को पुलिस और राजस्व विभाग की निगरानी में बर्बाद होते देख रही हैं। हैरानी की बात यह है कि यह संघर्ष विपक्ष के साथ नहीं, बल्कि खुद उनकी अपनी सरकार के प्रशासन के खिलाफ है!
“मेरी ज़मीन, मेरी फसल, फिर भी मैं अपराधी?”
सोशल मीडिया पर वायरल एक मार्मिक वीडियो में मालती यादव आँसू भरी आवाज़ में कहती हैं, “मेरे नाम खतौनी है, मेरी ही ज़मीन पर गेहूं की फसल खड़ी है, लेकिन प्रशासन मुझे काटने नहीं दे रहा! विपक्ष के पास न कोई कागज़, न स्टे ऑर्डर, न कोर्ट का आदेश… फिर भी पुलिस और राजस्व अधिकारी मुझे ही रोक रहे हैं!”
“अधिकारियों की मिलीभगत?”
मालती ने सीधे अहिरौली पुलिस और राजस्व अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे विपक्ष के साथ मिलकर उन्हें परेशान कर रहे हैं। उनका कहना है कि “जिन लोगों के पास ज़मीन का कोई दस्तावेज़ नहीं, उन्हें संरक्षण मिल रहा है, और मैं, जो भाजपा का पद संभालती हूँ, अपनी ही सरकार में न्याय के लिए तरस रही हूँ!”
“फसल बर्बाद होगी, तो आत्मदाह कर लूँगी!”
गेहूं की फसल का समय निकला जा रहा है, और देरी होने पर पूरी फसल खराब हो जाएगी। इस हताशा में मालती यादव ने आत्मदाह की चेतावनी दे डाली: “अगर मुझे अपनी फसल काटने नहीं दी गई, तो मैं BDO कार्यालय के सामने खुद को आग लगा लूँगी!”
क्या सत्ता के नशे में प्रशासन जनता का दुश्मन बन गया?
यह मामला सिर्फ एक नेत्री का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता का प्रतीक है। जब सत्ताधारी दल की ही नेता को न्याय के लिए आत्मदाह की धमकी देनी पड़े, तो यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है।
सवाल यह है:
क्या सरकारी अधिकारी अब निरंकुश हो गए हैं?
क्या विपक्ष के दबाव में प्रशासन निष्पक्षता भूल गया?
अगर एक पार्टी नेता की नहीं सुनी जा रही, तो आम जनता की आवाज़ कैसे उठेगी?








