
70वें कर्नाटक राज्योत्सव पर CM ने केंद्र सरकार पर निशाना
हिंदी थोपने और कन्नड़ उपेक्षा के आरोप
मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने की मांग
बेंगलुरु/कर्नाटक। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य की 70वीं स्थापना दिवस की तैयारियों और समारोहों के दौरान कन्नड़ भाषा को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कर्नाटक के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और हिंदी थोपने की लगातार कोशिशें हो रही हैं, जबकि देश की अन्य भाषाओं की उपेक्षा की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजी और हिंदी के दबाव से बच्चों की प्रतिभा कमजोर हो रही है। उन्होंने मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने और इसे कानून के तहत अनिवार्य करने की भी मांग की।
सिद्धारमैया ने सितंबर में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी पूछ लिया था कि “क्या आपको कन्नड़ आती है?” राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि वह कन्नड़ भले ही उनकी मातृभाषा नहीं है, लेकिन यह कर्नाटक की भाषा है और उन्होंने सभी भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करने की बात कही।
कर्नाटक का राज्योत्सव 1 नवंबर को मनाया गया। 1956 में मैसूर राज्य के रूप में गठित कर्नाटक को 1973 में वर्तमान नाम दिया गया। राज्योत्सव में झंडारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किए गए। राज्य का नारा है: “जहां भी रहो, जैसे भी रहो, सदा कन्नड़ बने रहो”।
कर्नाटक में कन्नड़ लैंग्वेज लर्निंग एक्ट-2015, लर्निंग रूल-2017 और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट रूल-2022 लागू हैं। इन नियमों के तहत सभी सरकारी ऑफिस, स्कूल, कॉलेज और व्यवसायों में कन्नड़ को प्राथमिकता दी जाएगी। सार्वजनिक साइनबोर्ड, विज्ञापन और पैकेजिंग पर कन्नड़ में जानकारी लिखना अनिवार्य होगा।








