अंबेडकरनगर। अकबरपुर क्षेत्र के मीरपुर शेखपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को कथा मंच पर आध्यात्मिक वातावरण चरम पर रहा। आचार्य शांतनु ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया और श्रोताओं को धर्म, दर्शन और जीवन मूल्यों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण संदेश दिए। कथा के दौरान गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही।
भारत की सभ्यता और अध्यात्म में गाय को बताया केंद्रस्थ
कथा प्रवचन में आचार्य शांतनु ने कहा कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म की जड़ें केवल परंपराओं तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर पक्ष से जुड़ी हैं। इसी क्रम में उन्होंने गाय के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि गाय केवल धर्म का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों और सनातन परंपरा की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि ऋग्वेद से लेकर श्रीमद्भागवत तक सभी ग्रंथों में गोसेवा को धर्म, विज्ञान और मानवता का मूल बताया गया है। कृषि, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक साधना—इन चारों क्षेत्रों में गाय की उपयोगिता सदियों से प्रमाणित है, इसलिए इसे कामधेनु का स्थान दिया गया है।
गौ-सेवा से शांति, संस्कृति और सद्भाव का भाव विकसित होता है
कथा में आचार्य ने कहा कि जिन परिवारों में गौ-सेवा होती है, वहां संतोष, समृद्धि, सद्बुद्धि और शांति का वास माना जाता है। गोसेवा मनुष्य के हृदय को कोमल और करुणामय बनाती है। यह केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समाज और मानवता के लिए उपयोगी जीवन पद्धति भी है। उन्होंने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में व्यक्ति जितना अध्यात्म से जुड़ेगा, उतना ही मन, बुद्धि और विचारों में स्थिरता एवं शांति प्राप्त होगी।








