
- धौर्रा और नगला खरगा गांव में बच्चों और युवाओं से बनते ‘देसी बम’
- पिछले 20 सालों में 36 से अधिक लोग हादसों में मरे
- पटाखा घरों में छिपकर तैयार, रात में दुकानदारों को सप्लाई
आगरा। एत्मादपुर तहसील के धौर्रा और नगला खरगा गांवों में बच्चों से लेकर बड़े लोग तक खुलेआम देसी बम और सुतली बम तैयार करते हैं। मांग के मुताबिक मिनटों में बम तैयार हो जाते हैं। यह इलाके आगरा कलेक्ट्रेट से लगभग 22 किलोमीटर दूर हैं और पिछले 20 सालों में यहां 36 से अधिक लोग बम हादसों में मारे जा चुके हैं।
गांव में पुलिस की अनदेखी, पटाखा कारोबार जारी
कानपुर की मेस्टन रोड के मिश्री बाजार में धमाके के बाद पूरे यूपी में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, मगर इन गांवों में पुलिस की पहुंच नहीं है। दैनिक भास्कर की टीम ने जब गांव में जाकर देखा, तो घरों में छिपकर पटाखों की स्टोरेज चल रही थी। अब यह पटाखे सीधे फुटकर नहीं बिकते, बल्कि रात के अंधेरे में दुकानदारों को सप्लाई किए जाते हैं। मार्केट में इन्हें दो गुना रेट पर बेचा जाता है।
खेतों के बीच घरों में पटाखे बनते देखे गए
भास्कर टीम ने आगरा-कानपुर हाईवे से करीब 7 किलोमीटर अंदर जाकर धौर्रा गांव का रुख किया। लगभग 2800 लोगों के इस गांव में खेतों के बीच बने घरों में बम तैयार हो रहे थे। टीम ने देखा कि घरों के बाहर तिरपाल बिछाकर बम सुखाए जा रहे थे।
घर के पास एक व्यक्ति पटाखों में बारूद भरते हुए नजर आया। वहीं बगल में एक महिला सफेद रंग का मटीरियल छान रही थी। बातचीत में पता चला कि उदयवीर अपनी पत्नी विजयरानी के साथ पटाखे तैयार कर रहे थे। कुछ दूरी पर खेतों में लड़के भी बम बना रहे थे। उन्होंने बताया कि कुछ केमिकल को बारीक पीसकर विजयरानी तैयार करती हैं, जबकि उदयवीर बारूद भरते हैं।
आसपास के जिलों तक सप्लाई
ये देसी पटाखे आगरा के अलावा मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस, अलीगढ़ और एटा के ग्रामीण इलाकों तक सप्लाई किए जाते हैं। यह काम कई पीढ़ियों से चल रहा है और स्थानीय लोगों की जीविका का हिस्सा बन चुका है।









