
अंबेडकरनगर। आलापुर तहसील में निर्विवादित नामांतरण वादों के निस्तारण में भारी लापरवाही सामने आ रही है। स्थिति यह है कि जमीनों की रजिस्ट्री बैनामा होने के बाद भी नामांतरण की प्रक्रिया महीनों तक पूरी नहीं हो पा रही है। कई मामलों में चार से पांच माह बीत जाने के बावजूद दाखिल-खारिज नहीं किया गया है, जिससे क्रेता और विक्रेता दोनों परेशान हैं।
रजिस्ट्री के बाद भी महीनों तक नहीं दर्ज हो रहे वाद
सूत्रों के अनुसार जमीनों की रजिस्ट्री के उपरांत सबसे पहले नामांतरण वादों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने में ही कई महीने लग जाते हैं। जब किसी तरह से मामले दर्ज हो पाते हैं और क्रेता-विक्रेता को नोटिस जारी हो जाती है, उसके बाद भी निर्विवादित मामलों का समयबद्ध निस्तारण नहीं किया जा रहा। तहसील में बड़ी संख्या में ऐसे वाद लंबित हैं, जिनमें किसी प्रकार का विवाद नहीं है, फिर भी उन्हें महीनों से लटकाया गया है।
पीठासीन अधिकारियों पर उदासीनता के आरोप
नामांतरण प्रक्रिया में देरी को लेकर तहसील के पीठासीन अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कभी हड़ताल का हवाला दिया जाता है तो कभी एसआईआर कार्य में व्यस्तता को कारण बताया जाता है। इन बहानों के चलते निर्विवादित वाद भी चार-चार माह तक लंबित पड़े रहते हैं। इससे न केवल आमजन को परेशानी हो रही है, बल्कि राजस्व व्यवस्था की कार्यक्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।









