- कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद ज़मीन पर कब्जा, पुलिस पर भी उठे सवाल
- अदालत की सख्ती के बाद हरकत में आई प्रशासनिक मशीनरी, अवैध निर्माण पर चला बुलडोज़र
- हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, समय पर कार्रवाई न होने पर दी जेल भेजने की चेतावनी
कानपुर। कानपुर में ज़मीन को लेकर चल रहा पुराना विवाद अब हाईकोर्ट की निगरानी में आ गया है। एक मामले में न्यायालय ने पुलिस को फटकार लगाते हुए जमीन पर एक घंटे में अवैध कब्जा हटाने का सख्त आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर आदेश की अवहेलना हुई, तो जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को जेल भेजा जा सकता है।
मामले के अनुसार, एक पारिवारिक संपत्ति को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। स्टे आदेश के बावजूद एक बिल्डर द्वारा उस पर टीन शेड और बाउंड्री वॉल खड़ी कर निर्माण सामग्री डाल दी गई। पीड़ित पक्ष ने इस बाबत पुलिस प्रशासन को कई पत्र भेजे, मगर कार्रवाई नहीं हुई।
मामला दोबारा हाईकोर्ट में पहुंचा, जहां पीड़ित पक्ष ने अवमानना याचिका दाखिल की। कोर्ट की नाराजगी के बाद नवाबगंज थाना पुलिस जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंची और अवैध कब्जा हटाया। इस कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग और तस्वीरें तैयार की गईं जिन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।
विवाद की जड़ में क्या है?
विवाद की शुरुआत करीब दो दशक पहले हुई थी जब ज़मीन का फर्जी बैनामा हुआ था। इसके खिलाफ मुकदमेबाजी चलती रही और एक बिंदु पर जाकर सिविल कोर्ट ने पुराने दस्तावेज रद्द कर दिए। बाद में असली मालिक ने जमीन किसी अन्य को बेची, लेकिन बिल्डर ने पुराने रिकॉर्ड के आधार पर फिर से कब्जा करने की कोशिश की।
स्टे आदेश मिलने के बावजूद मौके पर निर्माण गतिविधियां की गईं, जिससे पीड़ित पक्ष ने कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज करा दिया।
क्या होगा अगला कदम?
हाईकोर्ट सोमवार को इस मामले की फिर से सुनवाई करेगा। पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट, फोटो और वीडियो के आधार पर यह तय किया जाएगा कि आदेशों की अवहेलना में कौन-कौन जिम्मेदार है। अगर कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।








