
नई दिल्ली/नोएडा: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज गौर को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह मामला घर खरीदने वालों से लिए गए 12,000 करोड़ रुपए के फंड डायवर्शन से जुड़ा है।
मामला 2017 से लंबित:
कंपनी के खिलाफ यह केस 2017 से चल रहा है। इसमें करीब 21,000 फ्लैट खरीदार प्रभावित हुए हैं। नोएडा के विश टाउन और जेपी ग्रीन्स जैसे प्रोजेक्ट्स में फ्लैट बुक करने वाले खरीदारों को अब तक मकान नहीं मिले।
फंड डायवर्शन का आरोप:
ED के अधिकारियों ने बताया कि गौर ने कंपनी के फैसलों में अहम भूमिका निभाई और होमबायर्स और बैंक से लिए गए फंड्स को ग्रुप की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर किया। गिरफ्तारियों और छापेमारी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में 15 लोकेशन्स पर की गई, जिसमें 1.7 करोड़ रुपए कैश, डिजिटल डेटा और प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स जब्त किए गए।
IBC में बदलाव से मिली राहत:
2017 में IDBI बैंक की 526 करोड़ रुपए की डिफॉल्ट पिटीशन के बाद NCLT इलाहाबाद ने इन्सॉल्वेंसी प्रोसेस शुरू किया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने होमबायर्स को फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का स्टेटस देकर वोटिंग अधिकार दिए।
होमबायर्स की दशा:
फ्लैट के लिए एडवांस देने वाले हजारों लोग पिछले 8-10 साल से इंतजार कर रहे हैं। नोएडा के विश टाउन में खरीदारों ने कई बार प्रोटेस्ट किया। ED अधिकारी ने कहा, “यह केस क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी और डिशोनेस्ट इंड्यूसमेंट का है, जहां खरीदारों को झूठे वादों पर पैसे लिए गए।”








