वाराणसी। जमीन के मामले में बेदखली का आदेश मिलने के बाद आत्मदाह का प्रयास करने वाले बुजुर्ग की शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। वशिष्ठ नारायण गौड़ (65) को गंभीर रूप से झुलसने के बाद बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां देर रात उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
तहसील परिसर में लगाई आग
शुक्रवार दोपहर वशिष्ठ नारायण गौड़ राजातालाब तहसील पहुंचे। उनके पास पेट्रोल से भरा कमंडल था। अचानक उन्होंने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। मौके पर मौजूद वकील और पुलिसकर्मियों ने रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक वह आग के हवाले हो चुके थे।
वकील-पुलिस ने बुझाई आग, फिर भी बची नहीं जान
आग लगने के बाद बुजुर्ग चिल्लाते हुए दौड़ने लगे। पुलिसकर्मियों और वकीलों ने कपड़ा और मिट्टी डालकर किसी तरह आग बुझाई। लेकिन तब तक वह 50% से ज्यादा झुलस चुके थे। गंभीर हालत में उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
कोर्ट में हार के बाद उठाया कदम
मिर्जामुराद के जोगापुर निवासी वशिष्ठ नारायण के पास दो बीघा जमीन थी, जिस पर उनका कब्जा था। सरकारी रिकार्ड में यह भूमि ग्राम समाज की थी। तहसील राजातालाब में केस चला और 17 मई 2025 को तहसीलदार कोर्ट ने वशिष्ठ को जमीन से बेदखली का आदेश दिया।
इसके खिलाफ उन्होंने डीएम कोर्ट में अपील की, लेकिन 3 दिन पहले अपील भी खारिज कर दी गई। इसी से आहत होकर उन्होंने आत्मदाह का प्रयास किया।
बुजुर्ग के आखिरी शब्द
आग में झुलसने के बाद वशिष्ठ ने कहा था, “कहीं भी हमारा ठिकाना नहीं है। हमें न्याय नहीं मिला तो क्या करें? हमें उन लोगों ने मारा। क्या जब जान से मार डालेंगे, तब ही प्रशासन कुछ करेगा?”
प्रशासन और तहसीलदार पर सवाल
घटना के दौरान तहसीलदार श्याम नारायण तिवारी मौके से भाग निकले। वहीं कोर्ट के कर्मचारी भी परिसर छोड़कर चले गए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए शिवपुर भेजा है और परिवार को सूचना दी गई है।








