- आधार न होने पर भी स्कूल में दाखिला, लेकिन राहत अधूरी
- बच्चों की पढ़ाई के साथ शिक्षकों पर बढ़ता प्रशासनिक बोझ
- बीआरसी के चक्कर लगा रहे अभिभावक, बच्चों का समय हो रहा बर्बाद
अंबेडकरनगर। नवीन शैक्षिक सत्र के साथ परिषदीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘स्कूल चलो अभियान’ जिले में जोर पकड़ चुका है। सरकार की मंशा है कि 6 से 14 वर्ष की उम्र के सभी बच्चों को शिक्षा के अधिकार से जोड़ा जाए, जिसके तहत अब बिना आधार कार्ड के भी बच्चों को विद्यालय में प्रवेश मिल रहा है। लेकिन इसी के समानांतर ड्रेस की निशुल्क धनराशि के भुगतान में आधार की अनिवार्यता ने नई परेशानी खड़ी कर दी है।
जनपद के 1591 परिषदीय विद्यालयों में फिलहाल लगभग 1.72 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इन स्कूलों में मिड-डे मील, ड्रेस, किताबें, बैग, जूते और मोजे जैसी सुविधाएं मुफ्त प्रदान की जाती हैं, जिनकी धनराशि सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में भेजी जाती है। मगर यह पूरी प्रक्रिया अब आधार से लिंकिंग पर आधारित कर दी गई है, जिससे जिन बच्चों का आधार नहीं बना है या लिंक नहीं है, उन्हें ड्रेस की 1200 रुपये की राशि नहीं मिल पा रही है।
आधार न होने से ग्रामीण अंचलों में परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई ऐसे परिवार हैं, जिनके बच्चों का आधार कार्ड नहीं बना है या पंजीकरण की प्रक्रिया अधूरी है। ऐसे में शिक्षक बच्चों को ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) भेज रहे हैं ताकि वहां से आधार पंजीकरण कराया जा सके। लेकिन आधार बनवाने की धीमी प्रक्रिया के कारण अभिभावकों को बार-बार स्कूल और बीआरसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
शिक्षकों पर दोहरी जिम्मेदारी
शासन की योजनाओं को समय पर लागू कराने का दबाव विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों पर भी साफ देखा जा रहा है। बच्चों के प्रवेश से लेकर आधार लिंकिंग, बैंक खाता अपडेट, अपार और पेन आईडी जनरेशन तक की जिम्मेदारी अब शिक्षकों पर ही आ गई है, जिससे उनका मूल शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
शिक्षा विभाग का पक्ष
बेसिक शिक्षा अधिकारी भौलेन्द्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया, “शासन की ओर से निर्देश है कि आधार कार्ड न होने पर भी प्रवेश रोका नहीं जाएगा। जन्म प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेजों के आधार पर भी बच्चों का नामांकन किया जा सकता है। लेकिन ड्रेस की 1200 रुपये की धनराशि के लिए आधार लिंक होना आवश्यक है।”
समाधान की तलाश
जहां एक ओर अभियान के तहत बच्चों का विद्यालय से जुड़ाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आधार की अनिवार्यता से उपजे प्रशासनिक संकट ने व्यवस्था को उलझा दिया है। इस स्थिति में ज़रूरत है कि आधार पंजीकरण प्रक्रिया को तेज किया जाए और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से राहत दी जाए, ताकि वे फिर से पूरी तरह से बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।








