अप्रैल में थोक महंगाई में गिरावट- 13 महीनों का निचला स्तर दर्ज

  • अप्रैल में थोक महंगाई दर 0.85% तक घटी
  • फरवरी 2025 की महंगाई दर में 0.07% का इजाफा
  • खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण महंगाई में कमी

अप्रैल 2024 में थोक महंगाई 2.05% से घटकर 0.85% पर आ गई, जो कि पिछले 13 महीनों का सबसे कम स्तर है। मार्च 2024 में यह दर 0.53% थी।

फरवरी 2025 की महंगाई दर में वृद्धि
वहीं, फरवरी 2025 की महंगाई दर को सरकार ने संशोधित कर 2.38% से बढ़ाकर 2.45% कर दिया है।

महंगाई में कमी का कारण
रोजाना की जरूरत के सामान और खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण महंगाई में कमी आई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 14 मई को ये आंकड़े जारी किए।

थोक महंगाई का आम आदमी पर प्रभाव
अगर थोक महंगाई लंबे समय तक अधिक रहती है, तो इसका असर प्रोडक्टिव सेक्टर पर पड़ता है। थोक मूल्य बढ़ने से उत्पादक इसे उपभोक्ताओं पर डालते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए इसे नियंत्रित कर सकती है, जैसे ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी की कटौती की गई थी।

होलसेल महंगाई का विभाजन
होलसेल महंगाई तीन हिस्सों में बंटी हुई है –

  1. प्राइमरी आर्टिकल्स (22.62%)

  2. फ्यूल और पावर (13.15%)

  3. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स (64.23%)

रिटेल और थोक महंगाई में अंतर
रिटेल महंगाई (CPI) ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है, जबकि थोक महंगाई (WPI) उन कीमतों पर आधारित होती है जो एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है।

महंगाई मापने के प्रमुख घटक

  • थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75% है।

  • प्राइमरी आर्टिकल्स (फूड) 22.62%, और फ्यूल एंड पावर 13.15% है।

  • रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07%, और अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।

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