
- पुलिस की मध्यस्थता से टूटते रिश्तों को मिला नया जीवन
- संवाद की कमी ने बनाई थी दूरियाँ
- घरेलू मतभेदों ने ली थी गंभीर रूप
अंबेडकरनगर। अकबरपुर कोतवाली स्थित महिला हेल्प डेस्क पर सोमवार को एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला जहाँ चार परिवारों के टूटते रिश्तों को पुलिस अधिकारियों ने अपने धैर्य और समझदारी से जोड़ा। इन सभी मामलों में पत्नियाँ अपने पतियों से नाराज होकर मायके चली गई थीं और कई दिनों से दोनों पक्षों के बीच कोई बातचीत नहीं हो पा रही थी।
छोटी-छोटी बातों पर बढ़े थे विवाद
थानाध्यक्ष शिवांगी त्रिपाठी ने बताया कि इन चारों मामलों में मुख्य समस्या घरेलू खर्च, आपसी अविश्वास और एक-दूसरे की भावनाओं को न समझ पाना था। दैनिक जीवन की छोटी-छोटी तकरारें इतनी बढ़ गई थीं कि परिवार बिखरने की कगार पर पहुँच गए थे।
पुलिस ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
उपनिरीक्षक सुषमा और महिला आरक्षी प्रिया मिश्रा व सविता ने दोनों पक्षों को अलग-अलग समझाया और फिर आमने-सामने बैठाकर सुलह करवाई। थानाध्यक्ष शिवांगी त्रिपाठी ने कहा, “हमने उन्हें समझाया कि रिश्ते सिर्फ अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों और समझदारी का भी नाम है।”
आँसुओं के साथ निकाला गुबार
जब पति-पत्नी आमने-सामने बैठे तो वर्षों का दुख और गिले-शिकवे आँसुओं के रूप में बाहर आ गए। पुलिस टीम ने दोनों को एक-दूसरे की भावनाएँ समझने और संयम बरतने की सलाह दी। अंततः सभी चारों जोड़ों ने फिर से साथ रहने का फैसला किया।
महिला हेल्प डेस्क की सराहनीय पहल
यह घटना महिला हेल्प डेस्क की उस सार्थक भूमिका को उजागर करती है जहाँ पुलिस न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखती है, बल्कि समाज में रिश्तों को मजबूत करने का भी काम करती है। थानाध्यक्ष ने बताया कि ऐसे मामलों में वे हमेशा शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देते हैं।








