- यूरिया खाद की भारी कमी से किसान हो रहे परेशान
- सुबह से लाइन में लगने के बावजूद खाद नहीं मिल रही
- कृषि विभाग के दावे ज़मीनी हकीकत से परे
अम्बेडकरनगर। जिले में इन दिनों यूरिया खाद की किल्लत ने किसानों की परेशानियों को चरम पर पहुंचा दिया है। विभागीय दावों के उलट ज़मीनी हकीकत यह है कि खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जबकि किसान खेतों में धान की फसल को बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।
सुबह से लगी रहती है लाइन, फिर भी खाली हाथ लौटते किसान
भीटी ब्लॉक के पीसीएफ गोदाम पर स्थिति यह है कि तड़के से ही किसानों की लंबी कतारें लग जाती हैं, लेकिन निर्धारित समय पर वितरण शुरू होने के बावजूद अधिकांश किसान खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।खाद की मांग के अनुपात में आपूर्ति बेहद कम है।
स्थानीय किसान रामअवध यादव बताते हैं कि सुबह लाइन में लगे थे, नंबर दोपहर तक आया और तब बताया गया कि खाद खत्म हो गया। धान पीला पड़ रहा है, कोई सुनवाई नहीं हो रही।
कृषि विभाग द्वारा दावा किया जा रहा है कि जनपद में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है और सभी केंद्रों पर नियमित आपूर्ति की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि
कई केंद्रों पर दैनिक वितरण लक्ष्य से कम आपूर्ति हो रही है।खाद ट्रकों की असमय उपलब्धता,मनमानी वितरण समय औरकूपन प्रणाली में लचर व्यवस्था ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
इस समय धान की फसल टॉप ड्रेसिंग की अवस्था में है, जिसमें यूरिया की आवश्यकता सबसे अधिक होती है।
किसानों के मुताबिक,“अगर अगले 4–5 दिन में खाद नहीं मिला, तो फसल का विकास रुक जाएगा और पौधे पीले पड़ने लगेंगे। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।








