अंबेडकरनगर। एनटीपीसी टांडा परियोजना के दूसरे चरण में किए गए भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय किसानों में नाराजगी गहराती जा रही है। बुधवार को जिले के हासिमपुर, सलाहपुर, रजौर, हुसैनपुर और सुधाना गांव के प्रभावित किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।
किसानों का आरोप है कि अधिग्रहण प्रक्रिया में पुनर्वास नीति की खुलकर अनदेखी की गई है। कई परिवारों को न तो वैकल्पिक आवास दिया गया और न ही सामान समेटने का समय। परिणामस्वरूप दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
“बिना सूचना हटाया गया, घर का सामान भी नहीं समेट सके”
किसानों ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें अचानक बेदखल कर दिया। जिन घरों में वे वर्षों से रह रहे थे, उन्हें बिना पूर्व सूचना तोड़ दिया गया। अधिकांश परिवारों को जरूरी सामान निकालने का भी समय नहीं मिला। इस वजह से न केवल वे बेघर हुए हैं, बल्कि जरूरी वस्तुएं भी नष्ट हो गईं।
पुनर्वास की मांग, वैकल्पिक जमीन और आवास की अपील
ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि प्रभावित गांवों के निवासियों को तत्काल पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि जिन निर्धन व अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को पहले पट्टा मिला था, उन्हें उसी रूप में दोबारा पट्टा दिलाया जाए।
इसके साथ ही, एनटीपीसी द्वारा किए गए वादे के अनुसार विस्थापितों के लिए गेटेड कॉलोनी, स्थायी आवास, भोजन-पानी की सुविधा और ग्राम प्रधान की निगरानी में पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
नीति के अनुसार 18 वर्ष पार कर चुके युवाओं को मिले अनुदान
किसानों ने 16 अक्टूबर 2025 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सभी पात्र सदस्यों को सरकारी नीति 2012 के अनुसार अनुदान देने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान पहले चरण के समय भी लागू किया गया था और अब दोहराया जाना चाहिए।








