
नयी दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन ने मजबूत लोकतंत्र के लिए स्वस्थ न्यायिक व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि जमीनी स्तर पर न्याय व्यवस्था को मजबूत किए बिना हम एक स्वस्थ न्यायपालिका की कल्पना नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति रमन ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से देशव्यापी 40 दिवसीय कानूनी जागरूकता अभियान के समापन अवसर पर कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में न्यायपालिका हमेशा आगे रही है। इस देश की संवैधानिक अदालतों के फैसलों ने लोकतंत्र को फलने फूलने में सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका को स्थानीय अदालत के कार्यों के माध्यम से लोग जानते हैं। न्यायपालिका लोगों की मदद की अंतिम उम्मीद होती है। संकट में पड़ी महिला, देखभाल की आवश्यकता पड़ने पर बच्चे या फिर अवैध बंदी, सबसे पहले निचली अदालत का दरवाजा खटखटते आते हैं।
उन्होंने अदालती फैसलों के समाज पर प्रभाव का जिक्र करते हुए उच्च न्यायालयों एवं निचली अदालतों से सरल और स्पष्ट भाषा में निर्णय लिखने की अपील की। उन्होंने कहा कि चूंकि हमारे निर्णयों का बहुत बड़ा सामाजिक प्रभाव होता है, इसलिए हमें सरल और स्पष्ट भाषा में अपने निर्णय लिखने चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्थानीय अदालतों की व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ हमें ऐसे स्वयंसेवकों को साथ जोड़ने की जरूरत है जो आवश्यकता पड़ने पर पीड़ितों और उनके परिवारों को संवेदनशीलता के साथ मदद कर सकें। उन्होंने कानूनी सहायता आंदोलन को और आगे बढ़ाने के लिए वकीलों, विधि के छात्रों के साथ-साथ कानून के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने का काम करने वाले अधिक से अधिक लोगों जोड़ने को समय की मांग बताया।








