रेपो रेट में कटौती का फायदा- चार सरकारी बैंकों ने 0.50% घटाई लोन दरें

  • 30 लाख के होम लोन की EMI में ₹1,139 की राहत
  • नए और फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों को मिलेगा सीधा फायदा
  • फिक्स्ड रेट लोन धारकों को नहीं होगा लाभ

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 0.50% की कटौती के बाद सरकारी बैंकों ने ग्राहकों को राहत दी है। बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूको बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) को 0.50% तक घटा दिया है। इससे होम लोन, व्हीकल लोन समेत अन्य खुदरा लोन अब सस्ते हो जाएंगे।

PNB ने घटाई दरें, EMI में बड़ी राहत

पंजाब नेशनल बैंक ने बताया कि अब उसका होम लोन 7.45% की ब्याज दर से शुरू होगा, जो पहले 8% थी। वहीं व्हीकल लोन की दरें 7.80% से शुरू होंगी। बैंक के अनुसार, ₹30 लाख के 20 साल के होम लोन की EMI अब करीब ₹1,017 कम हो जाएगी। वहीं, 30 साल के लोन पर EMI में ₹1,139 की कटौती होगी।

अन्य सरकारी बैंकों ने भी घटाया RLLR

हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ने अभी अपने नए ब्याज दरों की घोषणा नहीं की है, लेकिन उन्होंने RLLR घटाने की पुष्टि की है। इससे आने वाले दिनों में उनके ग्राहकों को भी राहत मिलेगी।

नए लोन लेने वालों के लिए:
जो लोग नया होम लोन या व्हीकल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह अच्छा मौका है। बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंक में पहले होम लोन की ब्याज दर 8% थी, जो अब घटकर करीब 7.50% हो जाएगी।

पहले से लोन ले चुके ग्राहकों के लिए:
जिनका लोन RLLR से जुड़ा हुआ है और फ्लोटिंग रेट पर है, उनके लिए भी यह राहत की खबर है। ब्याज दरें उनके अगली रीसेट तिथि पर घट जाएंगी, जिससे EMI कम होगी या लोन की अवधि घटेगी। हालांकि, फिक्स्ड रेट वाले लोनधारकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।

रेपो रेट घटा, तो RLLR भी घटा

RLLR का सीधा संबंध RBI की रेपो रेट से होता है। बैंकों की लोन दरें RLLR के आधार पर तय होती हैं। RLLR में रेपो रेट के साथ बैंक एक मार्जिन जोड़ते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों की लागत भी कम होती है और वे लोन सस्ते कर सकते हैं।

इस साल 3 बार घट चुका है रेपो रेट

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 जून को जानकारी दी कि इस साल तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती की गई है।

  • फरवरी में रेपो रेट 6.5% से घटकर 6.25% हुआ।

  • अप्रैल में 0.25% की दूसरी कटौती की गई।

  • जून में तीसरी बार 0.50% कटौती हुई।
    कुल मिलाकर इस साल अब तक 1% की कटौती की जा चुकी है।

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