
हापुड़। उत्तर प्रदेश में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत लगातार गहराती जा रही है। राज्य के कई जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट के बीच हापुड़ में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक युवक को हार्ट अटैक आ गया।
हापुड़ में लाइन में लगे युवक को हार्ट अटैक
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे हापुड़ की एक गैस एजेंसी पर सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतार लगी थी। इसी दौरान लाइन में खड़े 35 वर्षीय पप्पू को अचानक दिल का दौरा पड़ गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे संभाला और सीपीआर (CPR) देने की कोशिश की।
स्थिति गंभीर होने पर उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। पप्पू कविनगर का निवासी है और किराए पर कार चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है।
देश में तीसरी घटना, पहले दो मामलों में हो चुकी है मौत
गैस सिलेंडर की लाइन में हार्ट अटैक का यह देश में तीसरा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले फर्रुखाबाद में 75 वर्षीय मुख्तार अंसारी और पंजाब के बरनाला जिले में 66 वर्षीय भूषण कुमार मित्तल को भी इसी तरह लाइन में खड़े-खड़े दिल का दौरा पड़ा था। इन दोनों मामलों में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
इन घटनाओं के बाद गैस वितरण व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्नाव में लोगों का फूटा गुस्सा, हाईवे किया जाम
उधर, उन्नाव में भैयाजी गैस एजेंसी को बिना किसी पूर्व सूचना के बंद किए जाने से लोगों का गुस्सा भड़क उठा। दोपहर करीब 1 बजे आक्रोशित लोगों ने कानपुर-लखनऊ हाईवे पर सिलेंडर रखकर जाम लगा दिया।
इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर किसी तरह जाम खुलवाया और स्थिति को नियंत्रित किया।
कानपुर में भी अव्यवस्था, OTP के बावजूद नहीं मिल रहा सिलेंडर
कानपुर में भी गैस वितरण व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके मोबाइल पर OTP आने के बावजूद एजेंसी पर पहुंचने पर उन्हें सिलेंडर नहीं दिया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि एजेंसी पर यह कहकर वापस लौटा दिया जाता है कि उनकी बुकिंग नहीं हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।






