
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के चौथे दिन शहजादपुर में गोरूवा चरावन मेला आयोजित
- सदियों पुरानी परंपरा, आज भी कायम उत्साह और जोश
- बच्चों के लिए गुब्बारे, बड़ों के लिए चोटही जलेबी रही खास पहचान
अंबेडकरनगर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के चौथे दिन शहजादपुर, अकबरपुर में पारंपरिक गोरूवा चरावन मेला हर वर्ष की तरह इस बार भी धूमधाम से आयोजित किया गया। डॉ. गणेश इंटर कॉलेज के सामने से लेकर संजय टॉकीज होते हुए पुलिस चौकी तक फैले इस ऐतिहासिक मेले में आज भी वही पुराना रंग और उत्साह देखने को मिला, जो इसे वर्षों से जनमानस से जोड़ता आया है।
सदियों पुरानी परंपरा, आज भी कायम जोश
गौरतलब है कि गोरूवा चरावन मेला की परंपरा सैकड़ों वर्षों पुरानी है। जन्माष्टमी के चौथे दिन लगने वाला यह मेला न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, बल्कि यह क्षेत्रीय संस्कृति, मेल-मिलाप और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। मेले में स्थानीय लोगों के अलावा दूरदराज से आए श्रद्धालु और दर्शक भी भारी संख्या में मौजूद रहे।
भीड़, गुब्बारे और जलेबियों की महक से सराबोर रहा माहौल
मेले में हर उम्र के लोगों की उपस्थिति देखने लायक रही। बच्चे जहां गुब्बारों और खिलौनों की दुकानों पर उमड़ते नजर आए, वहीं बुजुर्गों और युवाओं को ‘चोटही जलेबी’ का स्वाद चखते देखा गया, जो इस मेले की खास पहचान है। दुकानों की कतारें, चाट पकौड़ी के स्टॉल और सजी हुई रंग-बिरंगी सजावट ने मेले को और भी जीवंत बना दिया।








