
- दिल्ली हाईकोर्ट में सर्विस चार्ज पर आज सुनवाई
- सर्विस चार्ज बिल में जोड़ने का अधिकार मांगा
- CCPA की गाइडलाइन ने ऑटोमैटिक सर्विस चार्ज पर रोक लगाई
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट आज (9 मई) को रेस्टोरेंट्स में अनिवार्य सर्विस चार्ज को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा। यह सुनवाई नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) और होटल एसोसिएशन्स की अपील पर आधारित है। इन एसोसिएशन्स ने सर्विस चार्ज को बिल में शामिल करने के अधिकार को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) की गाइडलाइन पर रोक
इससे पहले, 28 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने CCPA की 2022 में जारी की गई गाइडलाइन को बरकरार रखा था, जिसमें कहा गया था कि होटल और रेस्टोरेंट फूड बिल में ऑटोमैटिक सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने रेस्टोरेंट एसोसिएशन द्वारा दिशा-निर्देशों को चुनौती देने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
NRAI का कहना- कोई कानून नहीं है सर्विस चार्ज लगाने से रोकने के लिए
NRAI ने अपनी याचिका में यह तर्क दिया कि कोई भी कानून रेस्टोरेंट्स को सर्विस चार्ज लगाने से नहीं रोकता। एसोसिएशन का कहना है कि दिशा-निर्देश मनमाने और अस्थिर हैं और इन्हें रद्द किया जाना चाहिए।
सर्विस चार्ज का मतलब क्या होता है?
सर्विस चार्ज वह राशि होती है जो ग्राहक को रेस्टोरेंट या होटल में खाने और अन्य सेवाओं के लिए भुगतान करनी होती है। यह आमतौर पर बिल का कुछ प्रतिशत होता है, जो ग्राहक बिना किसी सवाल-जवाब के भुगतान कर देता है। उदाहरण के तौर पर, अगर बिल 1,000 रुपये का है, तो 5% सर्विस चार्ज के साथ बिल 1,050 रुपये हो जाएगा।








