चंदन अस्पताल में रोबोटिक तकनीक से हिप और नी रिप्लेसमेंट की शुरुआत

  • 7 करोड़ की अमेरिकी रोबोटिक मशीन से हो रही जटिल सर्जरी
  • हड्डी की थ्री-डी मैपिंग कर बनती है सटीक सर्जरी योजना
  • मरीजों को कम दर्द, जल्दी रिकवरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चिकित्सा जगत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चंदन अस्पताल में अब अमेरिका से लाई गई अत्याधुनिक मेको रोबोटिक तकनीक की मदद से हिप और नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की जा रही है। करीब 7 करोड़ रुपये की इस रोबोटिक मशीन से बेहद जटिल सर्जरियों को भी अत्यंत सटीकता और सुरक्षा के साथ अंजाम दिया जा रहा है।

चंदन हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट के जॉइंट डायरेक्टर डॉ. नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि यह तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में एक नया युग लेकर आई है। इससे सर्जरी के दौरान सटीकता बढ़ी है, मरीजों को कम दर्द होता है और उनकी रिकवरी भी जल्दी होती है।

मेको तकनीक क्या है?

मेको रोबोटिक तकनीक हर मरीज की हड्डी की बनावट के अनुसार थ्री-डी मॉडल तैयार करती है। इससे डॉक्टर पहले से ही सर्जरी की सटीक योजना बना सकते हैं। सर्जरी के दौरान रोबोट डॉक्टर को रियल टाइम फीडबैक देता है, जिससे सर्जन हर कदम पर पूरी तरह नियंत्रित रहते हैं। इस प्रक्रिया में आसपास की हड्डियों और सॉफ्ट टिशू को नुकसान पहुंचने की संभावना बेहद कम हो जाती है।

कौन-कौन सी सर्जरियां हो रही हैं?

चंदन अस्पताल में अब टोटल हिप रिप्लेसमेंट (THR), टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) और यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट (UKR) जैसी जटिल सर्जरियां रोबोटिक तकनीक से की जा रही हैं। यह पारंपरिक नेविगेशन सिस्टम पर आधारित नहीं है, बल्कि हर मरीज के लिए अलग से सर्जरी की योजना बनाई जाती है और ऑपरेशन के दौरान जरूरत के अनुसार उसमें बदलाव भी संभव है।

कम दर्द, तेज रिकवरी

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि यह सिर्फ एक तकनीक नहीं बल्कि मरीजों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव है। हड्डी की सटीक कटाई के लिए इसमें रोबोटिक कटिंग गाइड्स का उपयोग होता है। इससे सर्जरी बेहद सुरक्षित, कम दर्द वाली और तेजी से रिकवर होने वाली होती है।

कितनी आती है लागत?

इस अत्याधुनिक तकनीक से घुटना प्रत्यारोपण की लागत लगभग 2.75 लाख रुपये आती है, जबकि पारंपरिक विधि से यह सर्जरी लगभग 2.5 लाख रुपये में होती है। यानी मात्र 25 से 30 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च कर मरीज को हाईटेक और सुरक्षित सर्जरी का लाभ मिल रहा है।

दुनिया में 6 लाख से अधिक सर्जरियां

डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, दुनियाभर के 1500 से अधिक अस्पतालों में मेको तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और अब तक 6 लाख से अधिक सर्जरियां इसकी मदद से सफलतापूर्वक हो चुकी हैं।

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