
- भारत का कठोर सैन्य कदम, पाकिस्तान को मिला कड़ा संदेश
- क्या है कोल्ड वॉर डॉक्ट्रिन, भारत की नई सैन्य रणनीति का खुलासा
- 6 मई की रात, पाकिस्तान पर भारत का अप्रत्याशित हमला, क्या था इसका मकसद?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता रोका, राजनयिकों की संख्या घटाई और बॉर्डर सील किया। पाकिस्तान को डर सताने लगा कि भारत सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, भारत ने तुरंत कोई बड़ा कदम नहीं उठाया, लेकिन 6 मई की रात अचानक 9 आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई भी भारतीय सेना ने आसमान में ही ध्वस्त कर दी। यह सब ‘कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन’ की रणनीति का नतीजा है।
क्या है कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन?
2001 में संसद हमले के बाद भारत ने यह रणनीति विकसित की। उस समय सेना को मोर्चे पर पहुंचने में तीन हफ्ते लगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव में कार्रवाई नहीं हो पाई। इसके बाद भारत ने एक ऐसी योजना बनाई, जिसमें सेना कुछ ही घंटों या दिनों में जवाब दे सके।
2010 के मुंबई हमले के बाद इस डॉक्ट्रिन पर और तेजी से काम हुआ। इसका मकसद है – “तेज, सटीक और सीमित हमला।” सेना को हमेशा ‘रेडी टू मूव’ मोड में रखा जाता है, ताकि पाकिस्तान की किसी भी प्रॉक्सी वॉर या आतंकी घुसपैठ का तुरंत जवाब दिया जा सके।
कैसे काम करती है यह रणनीति?
तेज तैनाती: पहले जहां हफ्तों लगते थे, अब सेना कुछ ही घंटों में बॉर्डर पर पहुंच जाती है।
सीमित लेकिन प्रभावी हमला: बड़ा युद्ध न छेड़ते हुए सर्जिकल स्ट्राइक या एयर अटैक से दुश्मन को नुकसान पहुंचाया जाता है।
तीनों सेनाओं का बेहतर तालमेल: आर्मी, एयरफोर्स और नेवी का कोऑर्डिनेशन मजबूत हुआ है, जिससे हमले और रक्षा दोनों क्षमताएं बढ़ी हैं।
पाकिस्तान को मनोवैज्ञानिक दबाव: इस डॉक्ट्रिन से पाकिस्तान को यह डर बना रहता है कि भारत कभी भी बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
अब सीमा पर क्यों नहीं है तनाव?
पहले जहां हर हमले के बाद सीमा पर लोग डरे रहते थे, अब भारतीय सेना के तेज और सटीक जवाबी कार्रवाई से लोगों को भरोसा है कि दुश्मन की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। सेना की तैयारी और तकनीक ने पाकिस्तान को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।








