- संगीत के माध्यम से आत्मिक उन्नति की ओर कदम
- रियाज़ के जरिए विद्यार्थियों ने सीखी संगीत की बारीकियां
- संगीत का अभ्यास, व्यक्तित्व निर्माण और मानसिक शांति का साधन
अम्बेडकरनगर। जिला मुख्यालय स्थित बीएनकेबी पीजी कॉलेज में चल रही 15 दिवसीय सुगम संगीत कार्यशाला के तहत बुधवार को प्रशिक्षुओं को शास्त्रीय संगीत के तीनों सप्तकों और अलंकारों का विशेष अभ्यास कराया गया। यह कार्यशाला संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, कॉलेज प्रशासन और संत गोबिंद साहब कल्चरल क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है।
प्रशिक्षक सचिन गिरि के मार्गदर्शन में आयोजित सत्र में छात्र-छात्राओं ने शुद्ध, कोमल और तीव्र स्वरों का रियाज़ किया। साथ ही, अलंकारों के माध्यम से सुर-ताल की शुद्धता और लयबद्धता पर ध्यान केंद्रित किया गया।
संगीत से मिलती है मानसिक शांति: प्राचार्य
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कॉलेज की प्राचार्य प्रो. शुचिता पाण्डेय ने कहा, “संगीत की नियमित साधना न केवल व्यक्तित्व को निखारती है, बल्कि मन को अनुशासित और स्थिर भी बनाती है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।”
आइक्यूएसी समन्वयक पाण्डेय ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि संगीत सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि जीवनशैली है, जो एकाग्रता और अनुशासन सिखाती है। वहीं, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. जयमंगल पाण्डेय ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ता है और आत्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
विशेषज्ञों ने दिए टिप्स
कार्यशाला के संयोजक वागीश शुक्ल ने बताया कि समन्वयक उपमा पाण्डेय और प्रशिक्षक सचिन गिरि के नेतृत्व में छात्रों को संगीत की बारीकियाँ सिखाई जा रही हैं। इस दौरान प्रो. श्वेता रस्तोगी, लेफ्टिनेंट डॉ. विवेक तिवारी, डॉ. अतुल मिश्र, मनोज श्रीवास्तव सहित कई शिक्षक और संगीतप्रेमी मौजूद रहे।
इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत से जोड़ना और उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति को निखारना है। अगले सत्रों में भी संगीत के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।








