
- सरकार का रणनीतिक कदम: सेना के पीछे खड़ी होगी टेरिटोरियल आर्मी
- संकट की घड़ी में फिर सक्रिय हुई भारत की छाया सेना
- युद्ध की तैयारी में केंद्र सरकार ने टेरिटोरियल आर्मी को दी हरी झंडी
नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए टेरिटोरियल आर्मी (प्रादेशिक सेना) को सक्रिय करने का आदेश दिया है। रक्षा मंत्रालय के निर्देश के तहत थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी अब ‘टेरिटोरियल आर्मी रूल्स 1948’ के नियम 33 के तहत किसी भी अधिकारी या जवान को जरूरत पड़ने पर सेना की सहायता के लिए तैनात कर सकते हैं।
टेरिटोरियल आर्मी को भारत की सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस के तौर पर जाना जाता है। यह अर्द्धसैनिक बल युद्धकाल में अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों की परछाईं बनकर उनके पीछे मजबूती से खड़ा रहता है।
युद्ध से लेकर आपदा तक, हर मोर्चे पर निभाई अहम भूमिका
टेरिटोरियल आर्मी ने 1962, 1965, 1971 और 1999 की लड़ाइयों में सेना का साथ देने के साथ ही विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में भी अपनी सेवाएं दी हैं। इस बल को उसकी वीरता के लिए अब तक 402 पदकों से नवाज़ा जा चुका है, जिनमें 1 कीर्ति चक्र, 5 वीर चक्र, 5 शौर्य चक्र, 74 सेना मेडल और 28 विशिष्ट सेवा मेडल शामिल हैं।
50 हजार सदस्य, 65 यूनिट्स में तैनात
फिलहाल टेरिटोरियल आर्मी में करीब 50 हजार सदस्य हैं, जो रेलवे, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) जैसी 65 विभागीय यूनिट्स और इन्फेंट्री व इंजीनियर बटालियन में कार्यरत हैं। इनकी ट्रेनिंग भारतीय सेना की तरह ही होती है, हालांकि यह एक अंशकालिक बल है और गैर-लड़ाकू कार्यों में लगाया जाता है।
कब अस्तित्व में आई टेरिटोरियल आर्मी?
इसकी स्थापना 18 अगस्त 1948 को 11 यूनिट्स के साथ की गई थी। 9 अक्टूबर 1949 को देश के पहले गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने इसका मुख्यालय शुरू किया था। तभी से हर साल 9 अक्टूबर को ‘टेरिटोरियल आर्मी डे’ मनाया जाता है।
कौन बन सकता है टेरिटोरियल आर्मी का हिस्सा?
ऐसे युवा जो किसी पेशे या व्यवसाय में कार्यरत हैं, वे भी इस अंशकालिक सेना में भर्ती हो सकते हैं। इसके अलावा रिटायर्ड सैनिकों को भी इसमें प्राथमिकता दी जाती है। भर्ती के लिए लिखित परीक्षा होती है, हालांकि पूर्व सैनिकों को इससे छूट मिलती है। आयु सीमा 18 से 42 वर्ष है और स्नातक के साथ शारीरिक व मानसिक फिटनेस जरूरी होती है।
सेवा शर्तें और ट्रेनिंग
भर्ती होने वाले व्यक्ति कम से कम 7 साल तक सेवा दे सकते हैं। प्रमोशन के जरिए कमीशंड अधिकारी भी बन सकते हैं और 20 साल की सेवा के बाद पेंशन का लाभ मिलता है। शुरुआती ट्रेनिंग 6 महीने की होती है, जिसके बाद हर साल 2 महीने का ट्रेनिंग कैंप और पहले दो सालों में 3 महीने की पोस्ट कमीशनिंग ट्रेनिंग अनिवार्य होती है।
कहां होती है तैनाती?
फिलहाल टेरिटोरियल आर्मी में 32 इन्फेंट्री बटालियन हैं। इनमें से 14 को देश की विभिन्न सैन्य कमानों में तैनात किया जा सकता है। यदि किसी अन्य मंत्रालय की मांग पर इन यूनिट्स की तैनाती होती है तो उसका खर्च उसी मंत्रालय को उठाना होता है, यह रक्षा मंत्रालय के बजट में शामिल नहीं होता।








