
- पाकिस्तान से आए 60 नागरिकों का डिपोर्टेशन, शहीद जवान की मां भी शामिल
- मुदासिर अहमद शेख की शहीदी और उनकी मां की पाकिस्तान डिपोर्टेशन
- जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी
श्रीनगर/जम्मू। भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में रह रहे 60 पाकिस्तानी नागरिकों को वापस पाकिस्तान भेजने का निर्णय लिया है। इनमें शौर्य चक्र विजेता (मरणोपरांत) जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद जवान मुदासिर अहमद शेख की मां शमीमा अख्तर और एक CRPF जवान की पाकिस्तानी पत्नी भी शामिल हैं।
PoK से आई शहीद जवान की मां, 45 साल से कश्मीर में रह रही थीं
पीटीआई के अनुसार, शमीमा अख्तर पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) की निवासी हैं और पिछले 45 साल से उरी में रह रही थीं। उनके बेटे मुदासिर अहमद शेख को 2022 में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहादत के बाद मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। मुदासिर के चाचा मोहम्मद यूनुस ने कहा, “शमीमा जब 20 साल की थीं, तभी उनकी शादी मेरे भाई से हुई थी। PoK भारत का हिस्सा है, सरकार को सिर्फ पाकिस्तानियों को डिपोर्ट करना चाहिए।” उन्होंने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह और LG मनोज सिन्हा ने परिवार से मुलाकात की थी और उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस मामले पर पुनर्विचार करेगी।
CRPF जवान की पाकिस्तानी पत्नी को भी भेजा जा रहा वापस
CRPF के जवान मुनीर खान की पत्नी मीनल खान भी पाकिस्तान से हैं। मुनीर ने मंगलवार को उन्हें अमृतसर ले जाया, जहां से उन्हें अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भेजा जाएगा। मीनल ने कहा, “हमने ऑनलाइन शादी की थी। हमें परिवार के साथ रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। हम आतंकी हमले की निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि दोषियों को सख्त सजा मिले।”
पहलगाम हमले के बाद सख्त कार्रवाई
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी वीजा धारकों को देश छोड़ने का आदेश दिया था। 27 अप्रैल तक 14 वीजा धारकों को भारत छोड़ना था, जबकि मेडिकल वीजा धारकों के लिए 29 अप्रैल अंतिम तिथि थी।
शहीद मुदासिर को मरणोपरांत मिला था शौर्य चक्र
मुदासिर अहमद शेख जम्मू-कश्मीर पुलिस के अंडरकवर ऑपरेटिव थे और 25 मई 2022 को बारामूला में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए थे। 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। बारामूला में एक चौक का नाम भी उनके नाम पर रखा गया है।









