नई दिल्ली। बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर गुरुवार को संसद के भीतर I.N.D.I.A गठबंधन के सांसदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने हाथ में एक पोस्टर पकड़ा हुआ था, जिस पर लिखा था— “SIR लोकतंत् र पर वार”। पोस्टर में ‘लोकतंत्र’ शब्द की गलत वर्तनी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने निशाना साधा और कहा कि “जिन्हें लोकतंत्र लिखना नहीं आता, वे अब लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने निकले हैं।”
बीजेपी ने इस विरोध प्रदर्शन की तस्वीर अपने आधिकारिक X हैंडल (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए विपक्ष पर तंज कसा।
व्याकरणिक रूप से ‘लोकतंत् र’ पूरी तरह गलत नहीं
हालांकि, भाषा विशेषज्ञों का कहना है कि ‘लोकतंत् र’ व्याकरण की दृष्टि से पूरी तरह गलत नहीं है। यह देवनागरी लिपि में संयुक्ताक्षर (त् + र = त्र) के सिद्धांत से जुड़ा मामला है। शब्द में ‘त्’ को हलन्त (्) के साथ लिखा गया है और उसके बाद ‘र’ जोड़ा गया है, जो कि देवनागरी लिपि में सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।
संसद की कार्यवाही रही बाधित
मानसून सत्र के चौथे दिन संसद की कार्यवाही फिर से बाधित रही। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने बिहार वोटर वेरिफिकेशन मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद वेल में आ गए और तख्तियां लहराने लगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नाराजगी जताते हुए कहा— “तख्तियां लेकर सदन नहीं चलेगा। ये आपके संस्कार नहीं हैं।” इसके बाद हंगामे को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही महज 12 मिनट में स्थगित कर दी गई। अगली बैठक शुक्रवार सुबह 11 बजे होगी।
इधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी मात्र 1 घंटा 45 मिनट चल सकी और बार-बार हंगामे के कारण उसे भी स्थगित करना पड़ा।








