
- MBA छात्र की किडनी 10 लाख में खरीदी, 60 लाख में बेची गई
- कम पैसे मिलने पर छात्र ने पुलिस को दी सूचना
- तीन अस्पतालों में एक साथ छापेमारी, 6 आरोपी गिरफ्तार
कानपुर। कानपुर में पुलिस ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का बड़ा खुलासा किया है। सोमवार देर रात हुई कार्रवाई में सामने आया कि एक MBA छात्र की किडनी महज 10 लाख रुपए में खरीदी गई, जबकि मरीज से 60 लाख रुपए वसूले गए।
पुलिस के मुताबिक, तय रकम से 50 हजार रुपए कम मिलने पर छात्र ने खुद पुलिस को कॉल कर पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने शहर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, अहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में एक साथ छापेमारी की।
जांच के दौरान मेड लाइफ हॉस्पिटल में किडनी डोनर छात्र और ट्रांसप्लांट कराने वाला मरीज भर्ती मिला। जब अस्पताल से ट्रांसप्लांट से जुड़े दस्तावेज मांगे गए तो कोई वैध कागजात पेश नहीं किए जा सके।
इसके बाद पुलिस ने अहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत समेत डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और दलाल शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
प्रारंभिक जांच में 12 से ज्यादा अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के सबूत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक फैला हुआ था।
कैसे हुआ खुलासा:
पुलिस पूछताछ में किडनी डोनर आयुष ने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है और मेरठ में रह रहा था। उसे एक टेलीग्राम ग्रुप के जरिए इस रैकेट में फंसाया गया।
मुख्य आरोपी शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा ने उसे कानपुर बुलाकर 10 लाख रुपए में किडनी बेचने की डील तय की।
रविवार को मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। उसके परिवार से 60 लाख रुपए लिए गए, लेकिन आयुष को केवल 9.50 लाख रुपए दिए गए। पैसे को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद आयुष ने पुलिस को सूचना दे दी।
जब अस्पताल प्रबंधन को भनक लगी कि पुलिस को जानकारी मिल गई है, तो डोनर को मेड लाइफ हॉस्पिटल और मरीज को प्रिया हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि पुलिस ने दोनों को ट्रेस कर लिया।
इस दौरान डोनर आयुष की हालत बिगड़ने पर उसे हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।







