
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीन देशों से एक साथ लड़ा भारत
- चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए, तुर्किये ने दिए ड्रोन
- 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए थे 26 पर्यटक
नई दिल्ली। भारतीय सेना के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने शुक्रवार को बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत एक नहीं, तीन दुश्मनों से लड़ रहा था। पाकिस्तान जहां सीधे मोर्चे पर था, वहीं चीन और तुर्किये ने उसे हथियार और तकनीकी सहायता मुहैया कराई।
नई दिल्ली में फिक्की के ‘न्यू एज मिलिट्री टेक्नोलॉजीज’ कार्यक्रम में जनरल सिंह ने कहा, “चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए और हमें ‘लैब’ की तरह इस्तेमाल किया गया। पाकिस्तान को हमारे हर रणनीतिक कदम की लाइव जानकारी दी जा रही थी। तुर्किये ने भी बैरेक्टर जैसे ड्रोन उपलब्ध कराए, जिनका उपयोग हमारे खिलाफ किया गया।”
आतंकी हमले के जवाब में चला था ऑपरेशन सिंदूर
यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद भारत ने 7 मई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। 10 मई की शाम को भारत-पाक के बीच सीजफायर पर सहमति बनी।
21 में से 9 ठिकानों पर हुई सटीक कार्रवाई
लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने बताया कि टारगेट सिलेक्शन पूरी तरह डेटा आधारित था। कुल 21 संभावित ठिकानों की पहचान की गई, जिनमें से 9 को निशाना बनाना रणनीतिक रूप से बेहतर समझा गया। अंतिम क्षणों में इन ठिकानों पर हमले का निर्णय लिया गया।
एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि भारत को मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम, काउंटर-रॉकेट, आर्टिलरी और ड्रोन तकनीक की सख्त जरूरत है।
“इस बार दुश्मन ने हमारे पॉपुलेशन सेंटर को निशाना नहीं बनाया, लेकिन अगली बार स्थिति अलग हो सकती है। हमें आयरन डोम जैसे सिस्टम की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना होगा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने इज़राइल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पास आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली है, लेकिन भारत का आकार बड़ा होने के कारण ऐसी सुविधाओं को विकसित करना और भी चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए सुरक्षा बजट में प्राथमिकता देने की बात कही गई।








