
- गरीबी दर 2011-12 में 16.2% से घटकर 2022-23 में 2.3% हुई
- ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यंत गरीबी में 16% की गिरावट
- भारत अब लो-मिडिल इनकम देशों की श्रेणी में शामिल
नई दिल्ली। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, 2011-12 में भारत में अत्यंत गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या 16.2% थी, जो 2022-23 में घटकर केवल 2.3% रह गई। इस दौरान गांवों में अत्यंत गरीबी दर 18.4% से घटकर 2.8% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह दर 10.7% से घटकर 1.1% रही। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत ने गरीबी के खिलाफ संघर्ष में हर साल 16% की दर से सफलता प्राप्त की है।
इसके साथ ही, भारत अब लो-मिडिल इनकम देशों की सूची में शामिल हो गया है। 2011-12 में जहां 61.8% लोग गरीबी में थे, वहीं 2022-23 में यह संख्या घटकर 28.1% रह गई। इस दौरान 37.8 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
वहीं, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत के पांच सबसे बड़े राज्यों—उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश—का अत्यंत गरीबी में रहने वालों के आंकड़े में अहम योगदान है। 2021-22 में इन राज्यों की हिस्सेदारी 65% थी, और 2022-23 तक इन राज्यों ने गरीबी में कमी के मामले में दो-तिहाई योगदान किया।
रिपोर्ट में नीति आयोग 2024 के आंकड़े भी साझा किए गए हैं, जिसमें बताया गया कि पिछले 9 वर्षों में 24.8 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। इनमें से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सबसे अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। इसके अलावा, भारत में गरीबी दर 2013-14 के 29.17% से घटकर 2022-23 में 11.28% रह गई है, जो एक महत्वपूर्ण गिरावट है।








