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नासा-इसरो की साझेदारी से भारतीय वायुसेना के पायलट को मिला सुनहरा मौका
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Ax-4 मिशन में चार देशों के एस्ट्रोनॉट्स, भारत के लिए गर्व का पल
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2000 घंटे की उड़ान का अनुभव रखने वाले पायलट का अब अंतरिक्ष में पहला मिशन
नई दिल्ली। भारत अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक नया इतिहास रचने को तैयार है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला मई महीने में अमेरिका की निजी कंपनी एक्सिओम स्पेस और नासा के सहयोग से लॉन्च होने वाले Ax-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की यात्रा करेंगे। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह जानकारी साझा की।
डॉ. सिंह ने लिखा, “भारत अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय और राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय होंगे।”
नासा-इसरो सहयोग से चुने गए भारतीय एस्ट्रोनॉट
इस मिशन में चार देशों के चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे, जो 14 दिनों तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रहेंगे। शुभांशु शुक्ला का चयन नासा और इसरो के बीच हुए एक अहम समझौते के तहत किया गया है।
शुभांशु शुक्ला: लखनऊ से अंतरिक्ष तक का सफर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले शुभांशु शुक्ला ने अलीगंज स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) का एंट्रेंस क्लियर किया और यहीं से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। NDA में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें JNU, नई दिल्ली से एफिलिएटेड डिग्री भी मिली।
2,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव
शुक्ला ने 17 जून 2006 को भारतीय वायुसेना के फाइटर विंग में प्रवेश किया था। वे एक अनुभवी फाइटर और टेस्ट पायलट हैं, जिनके पास 2,000 घंटे से ज्यादा का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है। वे सुखोई-30 MKI, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और An-32 जैसे विमानों को उड़ा चुके हैं।
स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल में होगी उड़ान
यह मिशन स्पेसएक्स की मदद से अंजाम दिया जाएगा। सभी अंतरिक्ष यात्री ड्रैगन कैप्सूल में बैठकर फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर (फ्लोरिडा) से रवाना होंगे। लॉन्चिंग की तारीख को मिशन की तैयारियों के अनुसार अंतिम रूप दिया जाएगा।








