अमेरिका : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है, जिससे सीजफायर टूटने की आशंका गहराने लगी है। दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता की तारीख और समय तय नहीं हो पाने से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ईरान ने इस देरी के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया है।
अब्बाश अरागची ने अपनाया सख्त रुख
तेहरान का कहना है कि उसके बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंध और लगभग 11 ट्रिलियन डॉलर की संपत्तियों को फ्रीज किए जाने से वार्ता प्रभावित हो रही है। इस बीच अब्बाश अरागची ने सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिका को 48 घंटे का अल्टीमेटम देने की बात कही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आया, तो सीजफायर समाप्त हो सकता है और हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी कड़ा संकेत दिया है। उसका कहना है कि जब तक उसकी संपत्तियां जारी नहीं की जातीं, तब तक इस अहम समुद्री मार्ग को बंद रखने पर विचार किया जा सकता है, जो वैश्विक तेल और व्यापार आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
वहीं दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका बिना किसी समय सीमा के कूटनीतिक प्रयास जारी रखना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा स्थिति में अमेरिका ने रणनीतिक बढ़त हासिल की है और यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य विकल्प भी खुला रहेगा, हालांकि परमाणु हथियारों के उपयोग की कोई योजना नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है और यही दबाव उसे बातचीत की मेज पर ला सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक असर डाल सकता है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर।









