
- कोर्ट में कंगना की वकील पर सवालों की बौछार, बचाव में दिया मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला
- वादियों ने लगाए गंभीर आरोप— किसानों, शहीदों और गांधीजी के अपमान का मामला
- इंस्टाग्राम पोस्ट बनी विवाद की जड़, कंगना को पद्मश्री वापसी की मांग तक पहुँची बात
आगरा। मंडी से बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर कानूनी विवादों में फंस गई हैं। शुक्रवार को स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट, आगरा में उनके खिलाफ चल रहे मामले में जोरदार बहस हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला 6 मई के लिए सुरक्षित रख लिया है।
कंगना की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने पक्ष रखा और कहा कि “कंगना के सभी बयान अखबारों और न्यूज चैनलों में आई खबरों पर आधारित थे। उन्होंने न तो कोई नई बात कही और न ही किसी का अपमान किया।” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कई मिसालें पेश करते हुए दलील दी कि “सिर्फ छपी हुई खबरों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।”
“राहुल-केजरीवाल पर हो सकती है FIR तो कंगना पर क्यों नहीं?”
वादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर ने तीखा पलटवार किया और कहा, “अगर मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं पर एफआईआर हो सकती है, तो फिर कंगना को क्यों बख्शा जाए?” उनके इस तर्क के बाद कोर्टरूम में बहस और तीखी हो गई।
“गांधी, शहीदों और किसानों का अपमान”
वादियों का आरोप है कि कंगना ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और किसानों का अपमान किया। उन्होंने दावा किया कि कंगना ने 2020-21 के किसान आंदोलन में भाग लेने वालों को “हत्यारा, बलात्कारी और अलगाववादी” बताया। वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि कंगना के बयान बीजेपी के 2014 के घोषणापत्र से प्रभावित थे।








