दिल्ली : दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। इस बार मामला कथित तौर पर कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को बिना अनुमति सोशल मीडिया पर अपलोड करने से जुड़ा है, जिस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
दिग्विजय सिंह और पत्रकार रविश कुमार को नोटिस जारी
जानकारी के मुताबिक, केजरीवाल और उनकी पार्टी के कुछ नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने अदालत की सुनवाई का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर साझा किया। याचिकाकर्ता का दावा है कि इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं और यह नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस मामले में अदालत ने दिग्विजय सिंह और पत्रकार रविश कुमार सहित कई लोगों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की गई है। इस बीच जस्टिस करिया ने खुद को मामले से अलग कर लिया, जिसके बाद इसे नई बेंच को सौंपा गया है।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि अदालत की अनुमति के बिना किसी भी कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसका प्रसारण पूरी तरह गैरकानूनी है। उनका आरोप है कि वीडियो के कुछ हिस्सों को चुनिंदा तरीके से साझा कर राजनीतिक एजेंडा चलाने की कोशिश की गई। सुनवाई के दौरान Meta और Google के प्रतिनिधियों से भी जवाब मांगा गया। अदालत ने पूछा कि क्या वीडियो के मूल अपलोडर की पहचान की जा सकती है। मेटा ने कहा कि उनके पास यूआरएल और कुछ यूजर डेटा उपलब्ध है, लेकिन शुरुआती अपलोडर की सटीक पहचान करना संभव नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी सामग्री को प्रसारित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस मामले में आगे की दिशा तय होगी।









