क्यों इस बार मानसून जल्दी आ रहा है? जानिए इसके वैज्ञानिक कारण।

  • मानसून के जल्दी आगमन का असर, क्या होगा किसानों पर
  • मानसून का वक्त से पहले आना, क्या हैं इसके कारण
  • वर्ष 2024 में मानसून का समय और क्या बदल सकता है

नई दिल्ली। भारत में इस साल मानसून अपनी सामान्य तारीख से पहले पहुंच सकता है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 27 मई को केरल तट से टकरा सकता है, जबकि आमतौर पर यह 1 जून को केरल पहुंचता है।

16 वर्षों में पहली बार होगा ऐसा

अगर मानसून 27 मई को आता है, तो यह 16 वर्षों में पहली बार होगा जब यह इतनी जल्दी दस्तक देगा। पिछले कुछ वर्षों में 2009 में यह 23 मई को और 2024 में 30 मई को केरल में पहुंचा था, जबकि 2018 में मानसून 29 मई को आया था।

सामान्य से ज्यादा बारिश का अनुमान

मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार मानसून सीजन में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम रविचंद्रन के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच 87 सेंटीमीटर के औसत से 105% बारिश होने की संभावना है। यह आंकड़ा सामान्य बारिश का संकेत है, जो 96 से 104% के बीच मानी जाती है।

अंडमान-निकोबार में मानसून की शुरुआत जल्द

अंडमान और निकोबार में भी मानसून की शुरुआत अगले हफ्ते तक हो सकती है। IMD के अनुसार, अंडमान-निकोबार में मानसून की एंट्री 13 मई तक हो सकती है।

मानसून का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर

भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए मानसून बेहद महत्वपूर्ण है। देश की लगभग 42.3 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और कृषि क्षेत्र GDP में 18.2% का योगदान देता है। मानसून की अच्छी बारिश से न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होती है, बल्कि यह जल आपूर्ति और बिजली उत्पादन को भी प्रभावित करती है।

आंकड़ों से पता चलता है कि 1972 में आया था सबसे देर से मानसून

IMD के आंकड़ों के अनुसार, 1972 में सबसे देरी से मानसून ने केरल को 18 जून को अपनी चपेट में लिया था, जबकि 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंचा था।

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