एनएच-133 परियोजना में बिना बंटवारे के भूमि अधिग्रहण

  • 10 सहखातेदारों ने लगाए जमीन पर अवैध कब्जे और मुआवजा न देने के आरोप
  • प्रशासनिक निष्क्रियता पर पीड़ित पक्ष ने जताई नाराजगी, तहसीलदार बोले जांच जारी
  • एसडीएम टांडा से संपर्क नहीं हो सका, स्थिति बनी अस्पष्ट

अम्बेडकरनगर। ग्राम आसोपुर एसएस में एनएच-133 परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण विवाद ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवादित गाटा संख्या 465 पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भौतिक बंटवारा किए बिना ही सड़क निर्माण करवा दिया है, जिससे 10 सहखातेदारों के अधिकारों का सीधा हनन हुआ है।

हाईकोर्ट ने दिया था स्पष्ट आदेश
इस विवाद को लेकर इसरार आलम समेत 9 अन्य सहखातेदारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिका दायर की थी, जिस पर दिनांक 22 अक्टूबर 2024 को न्यायमूर्ति राजन रॉय व बृज राज सिंह की खंडपीठ ने अपना आदेश पारित किया था।
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 30(2) के अंतर्गत तीन माह के भीतर उपजिलाधिकारी द्वारा भूमि के बंटवारे का निस्तारण करने के निर्देश दिए थे।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बंटवारा हुए बिना भूमि का अधिग्रहण गैरकानूनी है।

आवेदन, फील्ड रिपोर्ट, फिर भी कार्रवाई ठप
पीड़ितों ने 15 जनवरी 2025 को जिलाधिकारी अम्बेडकरनगर को आवेदन देकर भौतिक बंटवारे और मुआवजे की मांग की थी।
राजस्व विभाग की टीम ने मौके की जांच कर पोजीशन रिपोर्ट संख्या 57/225 में मामला दर्ज भी कर दिया।फिर भी, 22 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट द्वारा तय की गई समय-सीमा समाप्त हो जाने के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया।

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