
अम्बेडकरनगर। अम्बेडकरनगर में स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विभाग पर लगे वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने से चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और डिप्टी सीएमओ पर भ्रष्टाचार के आरोपों की शिकायतें जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति ही होती दिख रही है।
खरीद से लेकर तैनाती तक अनियमितताओं के आरोप
सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की खरीद, उपकरणों की आपूर्ति और कर्मियों की तैनाती में बड़े पैमाने पर मनमानी की गई है। कई शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विभाग के कुछ उच्च अधिकारी मिलकर पूरे तंत्र को अपने नियंत्रण में चलाते हैं। इन अधिकारियों पर आरोप है कि वे नियमों को ताक पर रखकर निजी लाभ के लिए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
शिकायतों के बढ़ने पर जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी और समिति को 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई।
जांच फाइलें दफ्तरों में घूम रहीं, कार्रवाई अधर में
जिले के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि जांच रिपोर्ट जानबूझकर रोकी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि जांच फाइलें विभागीय दफ्तरों में ही अटकी पड़ी हैं और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिशें जारी हैं। बताया जा रहा है कि जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उन्हीं के अधीनस्थ कर्मचारी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में टालमटोल कर रहे हैं।








